राजस्थान के ग्रामीण अंचलों में पंचायती राज व्यवस्था और जमीनी विकास की स्थिति औसत दर्जे की है। यह तस्वीर दैनिक भास्कर के 1 हजार संवाददाताओं द्वारा प्रदेश की करीब 14 हजार पंचायतों में की गई अब तक की सबसे बड़ी ऑडिट में सामने आई है। ऑडिट में पंचायत विकास सूचकांक में तय बिंदुओं रोजगार, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और पंचायतों के कामकाज के आधार पर विश्लेषण किया। इसमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है। स्थिति यह है कि कुल प्रतिक्रियाओं में से 45% से अधिक बार पांच में से सिर्फ 1 या 2 रेटिंग ही मिल सकी है। इन आंकड़ों के अनुसार, 63.7% पंचायतों में स्वच्छता अभियान नाकाम साबित किया है। 39.4% पंचायतों में रोजगार की स्थिति बेहद खराब है। सभी 6 पैमानों पर पंचायतों का ओवरऑल स्कोर 5 में से 3 है। जानिए किस पैरामीटर पर क्या स्थिति ​रही... श्मशान में मूलभूत सुविधाओं की कमी श्रीगंगानगर के ग्राम 50 जीबी में श्मशान की जमीन ही नहीं है। मजबूरी में ग्रामीणों को व्यस्त मुख्य सड़क के किनारे मात्र 10 फीट की कच्ची पट्टी पर अंतिम संस्कार करना पड़ता है। ये उदाहरण बता रहे हैं गांवों में अब भी ठीक नहीं हैं हालात... 4 से 5 रेटिंग सिर्फ 26.9% पंचायतों को ही मिली सभी 6 पैरामीटर्स पर मिली कुल प्रतिक्रियाओं में 4 व 5 की अच्छी रेटिंग 26.9% मामलों में दर्ज हो सकी है। इनमें से पेयजल आपूर्ति में बेहतर रेटिंग वाली पंचायतें 29.1%, स्वास्थ्य सेवाओं में 18.9% और सुदृढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर व पक्की सड़कों के मामले में बेहतर रेटिंग 27.0% ही सामने आई है। वहीं, अपने गांव में ग्रामीणों को टिकाऊ रोजगार देने के मामले में स्थिति मनरेगा के कारण थोड़ी बेहतर है। केवल 18.4% पंचायतों की ही रेटिंग 4 से ऊपर है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश में ऐसी पंचायतें, जिन्हें सभी 6 पैमानों पर 4 या 5 की उत्कृष्ट रेटिंग मिली हो, वे मात्र 5.3% ही हैं।