जिला परिषद के 29 वार्डों में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस की टिकट वितरण की सोशल इंजीनियरिंग सामने आने लगी है। दोनों दलों ने स्थानीय जातीय समीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर प्रत्याशियों का चयन किया, लेकिन महाजन वर्ग को किसी भी दल ने टिकट नहीं दिया। सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित सात वार्डों में भाजपा ने पांच जगह राजपूत समाज के प्रत्याशियों पर भरोसा जताया, जबकि कांग्रेस ने दो राजपूत और दो ब्राह्मण प्रत्याशियों को मौका दिया। शेष वार्डों में दोनों दलों ने ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों को उतारा। दूसरी ओर, कुमावत समाज ने दोनों प्रमुख दलों से टिकट नहीं मिलने के बजाय अपने स्तर पर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। समाज के आठ प्रत्याशी मैदान में हैं। बुधवार को सभी 29 वार्डों में नामांकन पत्रों की संवीक्षा पूरी हो गई। जिला परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस की प्रत्याशी सूचियों में महाजन वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं मिला। जिले के 29 वार्डों में किसी भी दल ने इस वर्ग के प्रत्याशी को टिकट नहीं दिया। कांग्रेस के मामले में इसे नगर परिषद के पिछले चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जहां महाजन वर्ग को टिकट नहीं मिला था। उस समय भी समाज में नाराजगी की चर्चा रही थी। अब जिला परिषद चुनाव में भाजपा की सूची में भी इस वर्ग को जगह नहीं मिलने से दोनों दलों के सामाजिक समीकरणों पर सवाल उठ रहे हैं। जिला परिषद के वार्ड 1, 7, 14, 16, 17, 20 और 29 सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित हैं। भाजपा ने इनमें पांच वार्डों में राजपूत समाज के प्रत्याशियों को टिकट दिया। वार्ड 16 में ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी को मौका दिया, जबकि वार्ड 29 में ओबीसी वर्ग के प्रत्याशी को उतारा। कांग्रेस ने सात सामान्य वार्डों में दो राजपूत और दो ब्राह्मण प्रत्याशियों को टिकट दिया। शेष तीन वार्डों में ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों पर भरोसा जताया। इस तरह दोनों दलों ने सामान्य वार्डों में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया। टिकट वितरण में महाजन वर्ग को जगह नहीं मिलने के साथ कुमावत समाज की चुनावी रणनीति भी चर्चा में है। समाज ने दोनों प्रमुख दलों से टिकट लेने के बजाय अपने स्तर पर चुनाव लड़ने का निर्णय किया है। इसके तहत आठ प्रत्याशी मैदान में उतारे गए हैं। इससे चुनाव में सामाजिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय समीकरणों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। नामांकन की संवीक्षा पूरी होने के बाद अब सभी 29 वार्डों में मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट होने लगी है। भाजपा और कांग्रेस के टिकट वितरण में राजपूत, ब्राह्मण और ओबीसी वर्ग को अलग-अलग अनुपात में प्रतिनिधित्व मिला है, लेकिन महाजन वर्ग की अनुपस्थिति और कुमावत समाज के स्वतंत्र प्रत्याशियों ने चुनावी चर्चा को नया मुद्दा दे दिया है। सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित वार्डों में भी स्थानीय जातीय समीकरण टिकट वितरण का आधार बने। वार्ड 1 में भाजपा ने भोपाल सिंह सोलंकी को प्रत्याशी बनाया, जबकि कांग्रेस ने ओबीसी बहुलता को देखते हुए लक्ष्मण गुर्जर को टिकट दिया। वार्ड 14 में भाजपा ने नरहरिदेव सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा, वहीं कांग्रेस ने रामचंद्र जाट पर भरोसा जताया। वार्ड 29 भीम क्षेत्र के गांवों से जुड़ा है। इसमें चेता, बाघाना, बरजाल, खीमाखेड़ा, चांदेला की गुंआर, छापली, दिवेर, पीपरेलू, काला गुमान और कालादेह सहित कई गांव आते हैं। यह क्षेत्र रावत बहुल माना जाता है। इसके बावजूद यहां भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों को टिकट दिया। इससे स्पष्ट है कि सामान्य वार्डों में भी दोनों दलों ने केवल आरक्षण की श्रेणी के बजाय स्थानीय सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा।