शाहाबाद के जंगलों में प्रस्तावित बिजली प्लांट में पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर कंपनी मैसर्स ग्रीनको एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड के विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। पहले जिन जगहों पर कंपनी ने पेड़ काटना अनिवार्य बताया था, अब उन्हीं जगहों पर पेड़ नहीं काटने की अंडरटेकिंग दे दी है। इस विरोधाभासी स्थिति को वन विभाग ने भी भांप लिया और अब पूरे मामले पर कंपनी से जवाब तलब किया है। कंपनी के बिजली प्लांट के लिए 407.82 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन के लिए स्टेज-1 अप्रूवल (सैद्धांतिक स्वीकृति) 10 मार्च 2026 को हो चुकी है। स्टेज 2 अप्रूवल (अंतिम स्वीकृति) की प्रक्रिया चल रही है। स्टेज 1 अप्रूवल देते हुए केंद्र सरकार ने शर्तें लगा दी थीं। इनमें दो शर्तें पेड़ों को बचाने से जुड़ी थीं। कंपनी ने एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि इनमें पेड़ काटना जरूरी है। अब कंपनी ने अचानक फॉरेस्ट कंजर्वेशन एक्ट (FCA) के नोडल अधिकारी को लिखित में अंडरटेकिंग देकर कह दिया कि दोनों शर्तों की पालना की जाएगी और कोई पेड़ नहीं काटा जाएगा। इसका खुलासा नोडल अधिकारी की ओर से सरकार को भेजे गए पत्र से हुआ है। गौरतलब है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 1.19 लाख पेड़ काटने का प्रस्ताव है। पेड़ काटने को लेकर विरोध है और ग्रामीण प्लांट के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। विरोधाभासी बयान से वन विभाग सतर्क, नई तकनीकी रिपोर्ट मांगी राजस्थान वन विभाग के विशिष्ट सचिव बीजो जॉय ने 14 अक्टूबर को एफसीए के नौडल अधिकारी को को लिखा कि अब कंपनी ने कोई पेड़ नहीं काटने की शर्त पर सहमति जताई है, जबकि पहले के पत्रों में मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद (MNNIT) की स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि बिना पेड़ काटे शर्त संख्या 10 की पालना किया जाना संभव नहीं है। पहले पेड़ काटने को अनिवार्य बताने के बाद अब बिना किसी नए तकनीकी अध्ययन के पेड़ नहीं काटने का पत्र देना विरोधाभासी है। इसलिए नए सिरे से मान्यता प्राप्त संस्थान से तकनीकी अध्ययन रिपोर्ट सबमिट की जाए, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि बिना पेड़ काटे सैद्धांतिक स्वीकृति की शर्तों (X एवं XXVII) की पालना कैसे होगी।