शहर का दायरा बढ़ने के साथ नगर निगम अग्निशमन विभाग के स्टेशन तो बढ़ा रहा, लेकिन विभाग गाड़ियों की कमियों से जूझ रहा है। इसके पास अभी 16 फायरबिग्रेड वाहन हैं। इनमें से 10 के रजिस्ट्रेशन तो खत्म हो गए हैं। 6 वाहन पूरे जिले की आग बुझाने की जिम्मेदारी उठा रहे हैं। जबकि गर्मी बढ़ने के साथ शहर में और पहाड़ियों पर आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में गाड़ियों के अभाव में आरएसएमएम, नारायण सेवा संस्थान, हिंदुस्तान जिंक और एयरपोर्ट की फायर गाड़ियों की मदद लेनी पड़ती है। इससे कई बार समय पर मदद नहीं मिल पाती है। खास बात यह है कि विभाग 3 साल में सरकार को 3 बार 25 गाड़ियां देने के लिए प्रस्ताव भेज चुका है, लेकिन अब तक एक भी गाड़ी नहीं मिली है। जिन 10 वाहनों के रजिस्ट्रेशन खत्म, वो 36 से 16 साल पुराने जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्रेशन खत्म हुए 10 वाहन 36 से 16 साल पुराने हैं। इन्हें मादड़ी स्टेशन पर खड़ा किया हुआ है। विभाग में 25 वाहनों की जरूरत है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी बाबूलाल चौधरी ने बताया कि सरकार को 25 वाहनों के लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है। इसमें 15 हजार लीटर क्षमता वाले 5 फायर वाटर बाउजर (एएचपीएल अटेचमेंट), 5 से 8 हजार लीटर क्षमता वाले नहीं हैं। यह एरियर हाइड्रोलिक प्लेटफार्म लैडर में वाटर सप्लाई का काम करता है। सभी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां वाटर टेंडर हैं। ये सामान्य आग बुझाने के काम आती हैं। विभाग के पास फोम टेंडर भी है, जो पेट्रोल-डीजल से लगी आग को बुझाने के काम आती हैं। इसके अलावा मिनी टेंडर शहर के अंदरूनी भागों में काम करती हैं। रेस्क्यू टेंडर विभाग में नहीं हैं। 7 फायर वाटर टेंडर व 5 फायर फोम टेंडर, 2500 से 3 हजार लीटर वाले मिनी वाटर टेंडर, 2 फायर मोटर बाइक उपकरणों सहित और 3 रेस्क्यू टेंडर शामिल हैं। वाटर बाउजर अभी विभाग के पास