राजस्थान के सरकारी स्कूलों में तबादले के बावजूद नई जगह कार्यग्रहण नहीं करने वाले प्राचार्यों और समकक्ष कार्मिकों पर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है। प्रदेश में ऐसे 211 प्राचार्य चिह्नित किए गए हैं। इनमें उदयपुर जिले के 9 प्राचार्य और समकक्ष अधिकारी शामिल हैं। कार्मिकों के तबादले इसी साल जुलाई और अगस्त में हुएए थे, लेकिन उन्होंने अब तक नई जगह जॉइन नहीं किया है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर ने सभी संयुक्त निदेशकों से रिपोर्ट मांगी है। इसमें कार्मिक का नाम, आईडी, कोर्ट केस की संख्या और जॉइन नहीं करने का कारण बताना होगा। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निदेशालय की कार्रवाई में उदयपुर जिले के 9 प्राचार्य और समकक्ष अधिकारी शामिल हैं। इनका तबादला होने के बावजूद नई जगह कार्यग्रहण नहीं करने का मामला सामने आया है। संयुक्त निदेशक स्तर पर इनसे संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। निदेशालय ने निर्देश दिए हैं कि अधीनस्थ कार्यालयों से जानकारी लेकर रिपोर्ट से भेजी जाए। इसमें यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित कार्मिक ने कोर्ट से स्टे लिया है या कार्यग्रहण नहीं करने के पीछे कोई अन्य कारण है।
9 प्राचार्य जिन्होंने नहीं किया कार्यग्रहण शिक्षक संघ की मांग- कार्रवाई से पहले पक्ष सुनें शिक्षा विभाग की सख्ती के बीच शिक्षक संगठनों ने भी अपना पक्ष रखा है। रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि विभागीय व्यवस्था बनाए रखने के लिए तबादला आदेशों की पालना जरूरी है। हालांकि, कई बार प्रशासनिक कारणों या पारिवारिक और न्यायिक विवादों के चलते शिक्षक नई जगह जॉइन नहीं कर पाते। उन्होंने मांग की कि किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित शिक्षकों का पक्ष भी सुना जाए, ताकि उनके साथ अन्याय न हो।
ज्यादातर शिक्षक कोर्ट से स्टे लेकर बैठे हुए हैं: जेडी यदि कोई आदेश न्यायोचित नहीं है, तो अलग बात है। इस पर सुनवाई हो सकती है, लेकिन जो बिना किसी कारण बैठे हैं, यह समझ से परे है। सभी से जानकारी जुटाकर निदेशालय को भेजी जा रही है। न्यायालय से विभाग की ओर से आग्रह भी किया जाएगा। इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जो कोर्ट से स्टे लाकर बैठे हुए हैं। कई स्कूलों में दो प्राचार्य भी हो गए हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो तबादले के बाद लंबे समय से उसी स्कूल में जमे हुए हैं। वीरेंद्र यादव, संयुक्त निदेशक व सीडीईओ विभाग ने पूछा- कोर्ट स्टे या कोई अन्य वजह? रिपोर्ट में कार्मिक का नाम, आईडी, न्यायिक वाद की संख्या और उसकी वर्तमान स्थिति जैसी जानकारियां मांगी गई हैं। विभाग यह भी जानना चाहता है कि तबादला आदेश के बाद कार्यग्रहण क्यों नहीं किया गया। क्या संबंधित कार्मिक को कोर्ट से स्थगन आदेश मिला है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है? निदेशालय इन जानकारियों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा। अवहेलना में जयपुर अव्वल कार्यग्रहण नहीं करने वालों में जयपुर सबसे आगे है। यहां 34 प्राचार्यों ने तबादला आदेश की पालना नहीं की है। जोधपुर में 16 प्राचार्यों ने नई जगह जॉइन नहीं किया है। वहीं, चूरू में 13 प्राचार्यों का कार्यग्रहण अटका हुआ है। शिक्षा विभाग अब इन सभी मामलों में कारणों की जानकारी जुटा रहा है। संयुक्त निदेशकों को मंडल स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर निदेशालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।