जनगणना 2027 के पहले चरण (मकान सूचीकरण) की शुरुआत के साथ ही प्रशासन और सरकारी विभागों के बीच टकराव पैदा हो गया है। एक ओर नगर निगम (विद्याधर नगर जोन) ने ड्यूटी जॉइन न करने वाले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग निदेशालय के 74 कार्मिकों को सीधे जेल भेजने और बर्खास्तगी की चेतावनी वाला ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। इन्हे 15 अप्रैल को ड्यूटी ज्वॉइन करनी थी अब 21 अप्रैल तक का अंतिम समय दिया गया है। उधर सामाजिक न्याय विभाग ने हाथ खड़े करते हुए कहा है कि इतने कर्मचारी दे दिए तो गरीबों की योजनाएं ठप हो जाएंगी। नगर निगम के जनगणना अधिकारी ने 74 कार्मिकों को नोटिस जारी कर 21 अप्रैल 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं होने पर 3 साल की जेल और जुर्माने की चेतावनी दी है। सामाजिक न्याय विभाग की लाचारी स्टाफ नहीं बचेगा तो काम कैसे करेंगे?” इस नोटिस के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। विभाग का तर्क है कि विभाग विधवा, दिव्यांग, अनाथ और बुजुर्गों के लिए पेंशन और सहायता योजनाएं चलाता है। कई कर्मचारी पहले से ही बूथ लेवल ऑफिसर की ड्यूटी पर है। विभाग ने कहा है कि 74 के बजाय केवल 10 कर्मचारी ही दे पाएगा, ताकि सरकारी योजनाओं का काम पूरी तरह बाधित न हो। नोटिस पाने वालों में बड़े अधिकारी भी निदेशालय के स्टाफ में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी, सहायक प्रशासनिक अधिकारी और सूचना सहायक शामिल हैं। तकनीकी स्टाफ में प्रोग्रामर और सहायक प्रोग्रामर, जिनकी कमी से डिजिटल डेटा का काम अटक सकता है। “पूरा स्टाफ जनगणना में भेज देंगे तो सरकार की योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा। जनता प्रभावित हो जाएगी। अभी तो 10 का स्टाफ दिया है। कुछ कर्मचारियों को और भेज सकते हैं, लेकिन सभी को भेजना संभव नहीं है।" -जेपी बैरवा, एडिशन डायरेक्टर