7 मार्च 2025 को प्रशिक्षु आईपीएस जतिन जैन ने बजरी खनन-परिवहन पर बड़ी कार्रवाई कर 38 वाहन पकड़े थे। लापरवाही पर तत्कालीन थाना प्रभारी विवेक हरसाना को लाइन हाजिर किया गया। इसी थाना क्षेत्र में दो साल पहले एक गिरोह पकड़ा था। इस थाने में 150 से ज्यादा पर एफआईआर हुई। ये लोग अफसरों व पुलिस के वाहनों पर नजर रख सूचनाएं देते थे। जिले के 33 में से 14 थाने बजरी खनन और परिवहन से प्रभावित हैं। इन थानों में मंगरोप, सदर, हमीरगढ़, बड़लियास, कारोई, कोटड़ी, पारोली, बीगोद, बागौर, मांडल, जहाजपुर, शक्करगढ़, हनुमाननगर, काछोला आदि क्षेत्रों में बनास, कोठारी नदियां गुजरती हैं। इन नदियों में बजरी का अवैध खनन होता है। वहीं चार-पांच थाने ऐसे हैं, जिनके क्षेत्र से अवैध बजरी से भरे वाहन गुजरते हैं। इन थानों की पुलिस कार्रवाई तो करती ही है, लेकिन सांठ-गांठ के आरोप भी लगते रहे हैं। करीब 5 साल पहले जहाजपुर एसडीएम के ड्राइवर कुलदीप की बजरी माफिया ने ट्रैक्टर चढ़ाकर हत्या कर दी थी। इसके कुछ दिन बाद जहाजपुर तहसीलदार की जीप को भी बजरी माफिया के वाहन ने टक्कर मारने की कोशिश की। 3 साल पहले बजरी भरे ट्रैक्टर रोकने पर माफियाओं ने जहाजपुर थाने के सिपाहियों का रास्ता रोककर हमले की कोशिश की। हनुमाननगर थाने के पूर्व एसएचओ रामकिशन गोदारा और कांस्टेबल महेंद्रसिंह को बजरी माफिया से सांठगांठ के आरोप में 17 अक्टूबर 2020 को तत्कालीन आईजी हवासिंह घुमरिया ने निलंबित कर दिया था। वहीं थाने के 7 पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में भेजा। रिपोर्ट के अनुसार लगभग पूरा थाना बजरी माफियाओं का सहयोग करता था। इसके दो दिन बाद ही एसपी ने थाने में बचे पुलिसकर्मियों का भी तबादला कर दिया। ^जिले में बजरी और गारनेट के अवैध खनन-परिवहन को लेकर लगातार कार्रवाई होती है। विशेष टीमें बनाकर और अभियान चलाकर भी जब्ती-गिरफ्तारी की गई। इसके बावजूद बजरी-गारनेट माफिया से मिलीभगत, डंपर-ट्रैक्टर को छोड़ने या लापरवाही करने की शिकायतों की जांच करवाकर गड़बड़ी और लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। माफिया या आपराधिक छवि वालों से सांठ-गांठ रखने वाले पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। - धर्मेंद्र सिंह, एसपी भीलवाड़ा राकेश पाराशर | भीलवाड़ा प्रदेशभर में चर्चित प्रशिक्षु आईपीएस माधव उपाध्याय को गारनेट मामले में अवैध वसूली करने वाली गैंग से मिलीभगत की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने एपीओ कर दिया था। जिले की दो प्रमुख बनास और कोठारी नदियों से अवैध बजरी और गारनेट खनन करने वाले माफिया से मिलीभगत के कारण वर्दी पर लगने वाले ये दाग नए नहीं हैं। एसपी धर्मेंद्र सिंह के पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल में 100 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड-लाइन हाजिर हो चुके हैं। इसमें से 33 पर तो बजरी-गारनेट मामलों में सांठ-गांठ या लापरवाही के सीधे आरोप है। इनके खिलाफ अवैध बजरी के डंपर-ट्रैक्टर ड्राइवर को छोड़ देने, बजरी माफियाओं से संपर्क की गोपनीय सूचना मिली थी। वहीं बजरी माफियाओं के साथ मारपीट-वसूली की भी शिकायत थी। बाकी 67 पुलिसकर्मी अनुशासनहीनता, शराब पीना, मुल्जिम फरार होने या अन्य लापरवाही के कारण निलंबित किए गए। वहीं 6 साल में ही करीब 200 पुलिस अधिकारियों -कर्मचारियों पर बजरी-गारनेट माफिया से सांठ-गांठ के आरोपों के कारण गाज गिर चुकी है। मिलीभगत या कार्रवाई नहीं करने पर निलंबित पुलिसकर्मी