मानसून का पहला चरण बीतने को है, लेकिन शुरुआती दौर में उदयपुर में बादलों की बेरुखी ने चिंता गहरी कर दी है। मानसून का यह पहला दौर बेहद कमजोर रहा है। कैचमेंट एरिया में पर्याप्त बारिश नहीं होने से पानी की आवक ठप है। इसका असर शहर की प्राण रेखा व पर्यटन की धड़कन फतहसागर झील पर पड़ा है, जहां कुल क्षमता का आधा पानी ही बचा है। 13 फीट भराव क्षमता वाली इस झील का जलस्तर इस समय 6.5 फीट पर थम गया है। संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि एक तरफ बादल बिना बरसे जा रहे हैं। दूसरी तरफ शहर का गला तर करने के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) इस झील से रोज 16 एमएलडी (1 करोड़ 60 लाख लीटर) पानी का उठाव कर रहा है। नई आवक शून्य होने से फतहसागर का पेटा कई कोनों से उघड़ने लगा है। जब तक मदार और पिछोला नहीं भरेंगे, तब तक फतहसागर में आवक नहीं फतहसागर को भरने में मुख्य भूमिका निभाने वाले फीडर- पिछोला झील, छोटा मदार और बड़ा मदार अभी रीते पड़े हैं। सामान्य तौर पर जब ये ऊपरी जलाशय लबालब होते हैं, तभी फतहसागर में पानी की आवक शुरू होती है। पानी नहीं होने से अमूमन जुलाई के मध्य तक पर्यटकों और शहरवासियों से गुलजार रहने वाली फतहसागर की पाल पर इस बार वह पारंपरिक रौनक नदारद है। बादलों के बावजूद उमस बरकरार, अगले चार दिन मौसम रहेगा शुष्क शहर में इन दिनों बादलों की आवाजाही और तेज हवाओं का दौर जारी है। मंगलवार को भी दिनभर बारिश जैसा माहौल बना रहा, लेकिन बादल बिना बरसे ही आगे निकल गए। बारिश नहीं होने से शहरवासियों को गर्मी-उमस से राहत नहीं मिल पा रही है। दिन का तापमान 32.8 डिग्री रहा। वहीं न्यूनतम 25.8 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञ डॉ. आरएस देवड़ा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी वाले इस नए सिस्टम का असर तुरंत मेवाड़ पर नहीं पड़ेगा। आगामी चार दिनों तक उदयपुर और आस-पास के इलाकों में मौसम मुख्यतः शुष्क ही रहेगा। इस दौरान तेज बारिश की उम्मीद बहुत कम है।