भास्कर न्यूज | अलवर काला कुआं सेटेलाइट अस्पताल सेटेलाइट अस्पताल में सोमवार सुबह 10 बजे ओपीडी रूम नंबर 7 में छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। प्लास्टर के साथ पंखा भी गिरा। इससे डॉक्टर व महिला मरीज गंभीर रूप से घायल हो गए। डॉ. सीताराम अग्रवाल का सिर फट गया। वहीं, लक्ष्मणगढ़ निवासी 25 वर्षीय टीना की नाक, दाहिने हाथ व पैर में गंभीर चोट आई। नाक में तीन टांके लगे। टीना थायरॉयड की जांच कराने आई थी। डॉक्टर को दिखाते समय हादसा हुआ। प्राथमिक इलाज के बाद सामान्य अस्पताल में रैफर किया गया। डॉ. अग्रवाल के सिर में भी 6 टांके लगे। उन्हें इलाज के बाद घर भेज दिया गया। घटना की सूचना पर एडीएम सिटी अंबा लाल मीणा, पीडब्लूडी एक्सईएन अल्का व्यास व अरावली विहार पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन खानापूर्ति कर लौट आए। कलेक्टर ने हादसे की रिपोर्ट मांगी है। इधर, चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने भी कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी। अस्पताल के ओपीडी में डॉक्टर की टेबल पर गिरा प्लास्टर व पंखा। अस्पताल में प्लास्टर गिरने से घायल डॉक्टर और महिला मरीज। सेटेलाइट अस्पताल ने साल 2025 में पीडब्लूडी से विभिन्न काम कराए थे। इसके पेटे पीडब्लूडी को 48 लाख रुपए दिए गए। लेकिन काम 41.57 लाख रुपए का ही हुआ। अस्पताल के 6.43 लाख रुपए पीडब्लूडी के पास शेष रह गए। अगस्त 2025 में अस्पताल ने पीडब्लूडी को पत्र लिखकर जर्जर कमरों की मरम्मत का तकमीना बनाने को कहा। कई बार पत्र लिखने के बाद पीडब्लूडी ने मई 2025 में छत की मरम्मत, रिनोवेशन, आयुष्मान योजना का लोगो व रंग-रोगन का 15.50 लाख रुपए का तकमीना बनाया। 18 मई को अस्पताल ने शेष 9.07 लाख रुपए पीडब्लूडी को जमा करा दिए। लेकिन फिर भी पीडब्लूडी ने टेंडर जारी नहीं किया। 145 भवनों में से 18 जर्जर हुए, 127 मरम्मत योग्य जुलाई 2025 में झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने एक कमेटी बनाकर स्कूलों सहित सभी सरकारी भवनों का सर्वे कराया था। इसमें चिकित्सा विभाग के कुल 145 भवनों में से 18 जर्जर मिले। 127 भवनों में छत व कमरे मरम्मत योग्य मिले। लेकिन किसी भी भवन का अभी तक काम पूरा नहीं हुआ। ^अस्पताल के कमरे व छत की मरम्मत के लिए पीडब्लूडी को कई पत्र लिखे हैं। हादसे का कारण मरम्मत नहीं होने के साथ फर्स्ट फ्लोर पर ऑक्सीजन प्लांट भी हो सकता है। प्लांट चलने के दौरान कमरे वाइब्रेट करते हैं। - डॉ. प्रमीला मीणा, पीएमओ, सेटेलाइट अस्पताल ^सीलन होने से प्लास्टर गिर सकता है। मरम्मत का टेंडर प्रक्रियाधीन है। अस्पताल ने रिवाइज्ड तकमीना मांगा था। इस कारण तकमीना बनने में समय लग गया। - अल्का व्यास, एक्सईएन, पीडब्लूडी सेटेलाइट अस्पताल भवन साल 1995 में एक मंजिला बना था। पहले यह पीएचसी था। साल 2011-12 में सेटेलाइट बना। ओपीडी कमरा नंबर-7 में पहले शौचालय था। साल 2013 में अस्पताल की एलएचवी शारदा गुप्ता ने अपनी सेवानिवृत्ति पर इसकी जगह कमरा बनवाया था। इसके बाद नए कमरे व दूसरी मंजिल बनाई गई।