सवाई मानसिंह (एसएमएस) स्टेडियम का इंडोर स्विमिंग पूल खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के बजाय अव्यवस्थाओं और मनमानी के आरोपों से घिर गया है। राज्य स्तरीय पदक विजेता तैराकों से नियमों के विपरीत प्रशिक्षण शुल्क वसूलने और वार्षिक सदस्य के लॉकर से नकदी व तैराकी का सामान चोरी होने के दो मामलों ने पूल संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह है कि इन मामलों में कार्रवाई के लिए राज्य क्रीड़ा परिषद के सचिव को स्वयं पत्र लिखना पड़ रहा है, तब पूल का संचालन और निगरानी व्यवस्था आखिर किसके भरोसे है। भीलवाड़ा-शाहपुरा निवासी वीर सिंह मीणा और रणवीर सिंह मीणा जयपुर में रहकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी कर रहे हैं। दोनों राज्य स्तरीय पदक विजेता हैं और नेशनल के लिए क्वालिफाई कर चुके हैं। खिलाड़ियों का आरोप है कि नियमों और एमओयू के अनुसार उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण मिलना चाहिए, लेकिन उनसे करीब 7,877 रुपए वसूले गए। आरोप है कि एक तैराक के लिए निर्धारित 3,500 रुपए के बजाय करीब 4,337 रुपए तक लिए गए। मामला क्रीड़ा परिषद तक पहुंचने पर सचिव राजकेश मीणा ने मैसर्स देवा स्विमिंग पूल इंस्टीट्यूट को पत्र लिखकर पात्र खिलाड़ियों से ली गई फीस लौटाने के निर्देश दिए, लेकिन खिलाड़ियों का कहना है कि अब तक राशि वापस नहीं मिली। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल दूसरी ओर, टोंक रोड निवासी और पूल के वार्षिक सदस्य अनुराग सिंह चौधरी ने आरोप लगाया कि संस्थान की ओर से आवंटित लॉकर से करीब 4 हजार रुपए नकद और तैराकी का सामान चोरी हो गया। घटना के बाद लॉकर प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। इन दोनों घटनाओं ने पूल संचालन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सवाल यह है कि जब खिलाड़ियों से नियमों के विपरीत शुल्क वसूला जा रहा हो, शिकायतों के बाद भी राहत न मिले और सुरक्षा व्यवस्था भी लचर हो, तो संचालन एजेंसी की जवाबदेही कैसे तय होगी? व्यवस्थाएं यदि खिलाड़ियों के लिए ही परेशानी का कारण बन जाएं, तो यह खेल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है।