बहरोड़ पंचायत समिति के 15 वार्डों में 3 नवबंर को होने वाला मुकाबला सामाजिक समीकरणों और महिला भागीदारी के इर्द-गिर्द नजर आ रहा है। पंचायत समिति सदस्य बनने के लिए 125 दावेदारों ने 138 नामांकन दाखिल किए हैं। प्रत्याशियों के सामाजिक वर्गों के आंकड़ों में ओबीसी की भागीदारी सबसे अधिक है। भाजपा और कांग्रेस ने भी प्रत्याशी चयन में इस वर्ग को प्रमुखता दी है। जबकि, बहरोड़ में प्रधान पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। वहीं, 66 महिलाओं के मैदान में उतरने से मुकाबले में महिला भागीदारी अहम हो गई है। नामांकन के आंकड़ों के अनुसार, चुनाव मैदान में ओबीसी वर्ग के 81, अनुसूचित जाति (एससी) के 31, सामान्य वर्ग के 25 और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का एक प्रत्याशी है। सामाजिक वर्गों के लिहाज से ओबीसी की भागीदारी सबसे अधिक है। हालांकि, इन आंकड़ों से चुनाव परिणाम का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ और मतदाताओं का समर्थन नतीजे तय करने में अहम होंगे। कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी मुकाबले को प्रभावित कर सकते हैं। पंचायत समिति के 15 वार्डों में 10 सामान्य, तीन ओबीसी और दो एससी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व देने में समान रणनीति अपनाई है। कांग्रेस ने 9 ओबीसी, 2 सामान्य और 2 एससी वर्ग के प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। भाजपा ने भी 9 ओबीसी, 2 सामान्य और 2 एससी वर्ग के उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।