एडमिशन के नाम पर फीस लेकर बाद में नियमों का हवाला देकर रकम रोकने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, भरतपुर ने ग्वालियर के जय इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग एंड रिसर्च को न केवल बकाया फीस लौटाने बल्कि मानसिक संताप के लिए हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। मामले में भरतपुर निवासी कृष्णकांत बघेल ने 3 अप्रैल 2024 को नर्सिंग प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए कॉलेज से संपर्क किया था। सत्र 2021-22 की खाली सीट के लिए 52 हजार रुपए जमा कराए और रसीद दे दी। बाद में जांच करने पर सामने आया कि कॉलेज की मान्यता को लेकर विवाद चल रहा है और प्रवेश की निर्धारित तारीख भी निकल चुकी है। इस पर छात्र ने एडमिशन निरस्त कर फीस वापस मांगी, लेकिन कॉलेज ने 14 जून 2024 को केवल 26 हजार रुपए लौटाए और बाकी जल्द देने का वादा कर नहीं लौटाए। मामला ग्वालियर का होने से भरतपुर आयोग को सुनवाई का अधिकार नहीं है। आयोग ने दोनों तर्कों को खारिज कर स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 34(2) के तहत परिवादी अपने निवास स्थान पर भी परिवाद दायर कर सकता है। आयोग अध्यक्ष आलोक उपाध्याय और सदस्य नंदिनी गोयल की पीठ ने 26 हजार रुपए 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए।