तपते रेगिस्तान के बीच तालाब व पोखर ही मवेशियों की प्यास बुझाने की आस होती है। लेकिन अभी 42 से 45 डिग्री के बीच तापमान में यह तालाब भी सूख गए हैं। यहां कहीं कहीं पैंदे में दलदल जमा हो रखी है। ऐसे में जब पशु यहां अपनी प्यास बुझाने के लिए आते हैं तो पानी की तलाश में पैंदे के अंदर पैर रखते ही दलदल में धंस जाते हैं। एक बार फंसने के बाद निकलने के प्रयास में और अधिक धंसते ही जाते हैं। प्यास की मार से पहले ही परेशान पशु फिर अपनी जिंदगी यहीं हार जाता है। वर्तमान में ऐसे तालाब के अंदर गोवंश, वन्य जीवों के कंकाल मिल रहे हैं, जो पानी की तलाश में यहीं फंसकर जिंदगी हार चुके हैं। यह तस्वीर बाड़मेर के निकट लाखेटाली गांव की हैं। यहां का तालाब सूख चुका हैं और पैंदे के पास दलदल जमा हो गई हैं। इसमें एक पशु का कंकाल दिख रहा है, जो यहां दलदल में फंसने से दम तोड़ चुका है।