पचपदरा स्थित निर्माणाधीन रिफाइनरी में हुए भीषण अग्निकांड को पांच दिन बीत चुके हैं। धुआं भले ही छंट गया हो, लेकिन इस हादसे के पीछे की आग अब भी सुलग रही है। विडंबना यह है कि पांच दिन बाद भी न तो प्रशासन हादसे की किसी ठोस वजह तक पहुंच पाया है और न ही इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार किसी बड़े अधिकारी या एजेंसी पर गाज गिरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा रद्द होने के तुरंत बाद सभा स्थल पर लगाए गए तीनों विशाल डोम को खोलने का काम शुरू किया गया था। लेकिन अचानक इन डोम को खोलने की प्रक्रिया पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सूत्रों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का हस्तक्षेप माना जा रहा है। एजेंसियों ने अब इन डोम को भी जांच का हिस्सा माना है, इसके कारण इन्हें यथावत रखने के निर्देश दिए गए हैं। पीएम की सुरक्षा को लेकर एजेंसियां गंभीर प्रधानमंत्री का दौरा किसी भी राज्य के लिए सर्वोच्च सुरक्षा का विषय होता है। रिफाइनरी जैसे संवेदनशील जोन में आग लगना और वो भी ठीक उसी समय जब प्रधानमंत्री वहां पहुंचने वाले हो। 20 घंटे पहले उसी जगह आग लगी, जहां प्रधानमंत्री रिफाइनरी का उद्घाटन करने वाले थे। इसे सुरक्षा एजेंसियां हल्के में नहीं ले रही हैं। डोम को न खोलने का सीधा मतलब है कि एजेंसियां वहां से फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाना चाहती हैं। एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या यह आग जानबूझकर लगाई गई थी। डोटासरा ने कहा- जिम्मेदारों पर एक्शन नहीं, सिर्फ खानापूर्ति पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा ने रिफाइनरी में हुए अग्निकांड पर कहा कि उद्घाटन चार महीने पहले होना था, लेकिन अब तक नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी आने वाले हैं, वहां कुछ घंटे पहले ही आग लग जाती है, यह किसकी जिम्मेदारी है। रिफाइनरी में आग लगे चार दिन हो गए, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि आग कैसे लगी, कौन दोषी है और किसका सुपरविजन था। मंच पर चढ़कर एक युवक के वीडियो बनाने पर थानेदार को सस्पेंड किया गया। जबकि सस्पेंड तो सीएम भजनलाल और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को करना चाहिए था।