भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की तपिश अब अस्पतालों और मेडिकल स्टोर तक पहुंच गई है। युद्ध के कारण दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) और सर्जिकल आइटम्स की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे मरीजों के इलाज का कुल बजट 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है। राहत की बात यह रही कि मार्च में स्टॉक होने से काम चल गया, लेकिन अप्रैल में नई दरों का बोझ आम जनता पर पड़ेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने 900 से अधिक दवाओं की कीमतों में थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर 0.65 प्रतिशत की वृद्धि की थी। लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। कच्चे माल की लागत बढ़ने और दवा बाजार से मिल रही छूट खत्म होने से उपभोक्ताओं को अपनी जेब से 10 प्रतिशत से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। { कच्चे माल की कीमतों में उछाल : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण एपीआई के दाम में 25 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत में 47 प्रतिशत तक इजाफा हुआ। . सप्लाई चेन में बाधा: युद्ध के कारण शिपिंग और इंश्योरेंस चार्ज बढ़ गए हैं। कच्चा माल लाने वाले जहाजों का समय दोगुना से अधिक हो गया है। अब 30-40 दिन की जगह 80-90 दिन लग रहे हैं। माल ढुलाई में वृद्धि: माल ढुलाई की दरें दोगुनी होने, ट्रांसपोर्टेशन, डीजल, पीएनजी की कीमतों ने बढ़ाई है। . पैकेजिंग सामग्री : दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला पीवीसी के दाम 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। राकेश काबरा, सचिव, जिला केमिस्ट संस्थान युद्ध का सीधा असर दवाओं और सर्जिकल आइटम की कीमतों पर पड़ा है। युद्ध वापस शुरू हुआ तो संकट बढ़ेगा। दवाएं महंगी होंगी। प्लास्टिक व पॉलिमर आधारित 90 % सर्जिकल आइटम्स (ग्लव्स, कैनुला, सीरिंज) के दाम बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। मरीजों को अब ये जरूरी सामान महंगे दामों पर खरीदने पड़ रहे हैं। दवाओं और सर्जिकल आइटम के दाम बढ़ने के मुख्य कारण