नई भर्तियों का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए स्टाफिंग पैटर्न नई उम्मीद बन सकता है। माध्यमिक शिक्षा विभाग में 11 साल बाद स्टाफिंग पैटर्न करने की तैयारी है। इससे यहां पदों की संख्या में बड़ा बदलाव होगा। विभाग में 1 लाख 23 हजार 186 पोस्ट बढ़ाने का प्रस्ताव है। जो वर्तमान में स्वीकृत पदों का करीब 32 फीसदी है। विभाग की ओर से तैयार किए गए स्टाफिंग पैटर्न के प्रस्ताव के अनुसार वर्तमान में स्वीकृत पद 3 लाख 92 हजार 431 है। इन पदों की तुलना में अब 5 लाख 15 हजार 617 पदों की जरुरत बताई गई है। इससे पहले वर्ष 2015 में स्टाफिंग पैटर्न हुआ था। 2 कैडर की पोस्ट में होगी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी सबसे अधिक बढ़ोतरी स्कूल लेक्चरर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की प्रस्तावित है। वर्तमान में लेक्चरर के 55 हजार 114 पद स्वीकृत हैं, जबकि समीक्षा के बाद इनकी आवश्यकता 84 हजार 241 पोस्ट कैलकुलेट की गई है। यानी लेक्चरर के नए 29 हजार 127 नए पद जोड़ने का प्रस्ताव है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वर्तमान में 27 हजार 720 पद स्वीकृत हैं। इन पदों में 23 हजार 840 की बढ़ोतरी कर 51 हजार 560 पद करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। क्या होगा पैटर्न बदलने का असर विभाग का मानना है कि पदों में बढ़ोतरी से स्कूलों में बच्चों की विषयवार पर्याप्त शिक्षक मिल सकेंगे। स्कूलों की मॉनिटरिंग आसान होगी और स्कूलों में सफाई, रखरखाव और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं में सुधार होगा। फिलहाल स्टाफिंग पैटर्न समीक्षा के आधार पर तैयार किया गया प्रस्ताव है। इसको वित्त विभाग को भेजा जाएगा। वित्तीय स्वीकृति मिलने पर राज्य सरकार नए पदों के सृजन को मंजूरी देगी। इसके बाद पदों का अंतिम निर्धारण, कैडरवार स्वीकृति और चरणबद्ध तरीके से भर्ती या पदस्थापन की प्रक्रिया शुरू होगी। अंतिम निर्णय राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही प्रभावी होगा। यह होगा फायदा यदि स्टाफिंग पैटर्न को सरकार से मंजूरी मिलती है और यह लागू होता है तो विद्यालयों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात बेहतर होगा। विषयवार शिक्षकों की कमी दूर होगी। प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों का संचालन मजबूत होगा। शिक्षा में सुधार होगा। क्या है स्टाफिंग पैटर्न स्टाफिंग पैटर्न वह व्यवस्था है जिसके आधार पर यह तय किया जाता है कि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या, कक्षाओं, विषयों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार कितने शिक्षक, प्रधानाचार्य, पुस्तकालयाध्यक्ष और अन्य कर्मचारी होने चाहिए। “यह प्रस्ताव बेरोजगार युवाओं के लिए ही नहीं, सेवारत शिक्षक-कर्मचारियों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आया है। इससे नई भर्तियां निकलेंगी। पदोन्नति के अधिक अवसर मिलेंगे। सरकार को चाहिए कि इसके वर्तमान में चल रहे शिक्षा सत्र से ही लागू कर दिया जाए।” -विपिन प्रकाश शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष,राजस्थान प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक संघ