पंचायत और निकाय चुनाव कराने के लिए समयवृद्धि को लेकर राज्य सरकार इसी हफ्ते कोर्ट में अंतरिम प्रार्थना पत्र पेश करेगी। कोर्ट ने पूर्व में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के दिशा-निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट नहीं मिलने का हवाला देते हुए समय वृद्धि की मांग करेगी। राज्य सरकार ने हाल ही में ओबीसी प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल सितंबर तक बढ़ाया है। लिहाजा, इसे आधार बनाते हुए समय वृद्धि की मांग की जाएगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ के प्रति अपना स्टैंड बता चुकी है। माना जा रहा है कि यही वजह रही कि पंचायती राज और स्वायत्त शासन विभाग ने पिछले साढ़े तीन महीने में निर्वाचन आयोग के करीब सात पत्रों को नजरअंदाज किया है। 7 पत्रों का जवाब नहीं दिया यूडीएच-पंचायती राज ने राज्य निर्वाचन आयोग ने अप्रैल में चुनाव कराने के लिए सरकार के स्वायत्त शासन और पंचायती राज विभाग को सात अलग-अलग पत्र लिखे, लेकिन एक में भी चुनाव कराने संबंधी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। बताया जा रहा है कि ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की सरकारी मंशा के कारण ऐसा हुआ। सरकार से जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई हुई सरकार से जवाब न मिलने पर आयोग ने 20 फरवरी को एकतरफा कार्रवाई करते हुए उन 196 निकायों के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी कर दिया, जो हाईकोर्ट के निर्णय से अप्रभावित थे। इन क्षेत्रों में 22 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होना तय है। शेष 113 निकायों व अन्य के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने के बाद आयोग ने 24 मार्च को उनके लिए अलग से पुनरीक्षण कार्यक्रम जारी किया है।