प्रयास संस्थान चूरू की तरफ से रविवार शाम सूचना केंद्र में हिंदी साहित्य सम्मान समारोह हुआ। समारोह की अध्यक्षता कर रहे साहित्यकार प्रो. असगर वजाहत ने कहा कि विचार एक नाव की तरह है जो नदी पार तो करा सकती है, लेकिन नदी पार करने के बाद आगे का सफर व्यक्ति को खुद ही तय करना पड़ता है। समय और भूगोल की सीमा लांघने वाला ही महाबली होता है। उन्होंने कहा कि आज साहित्यकारों के सामने यह सवाल बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है कि क्या साहित्य से समस्याओं का समाधान होता है? इस तरह की चुनौतियों को स्वीकार करना ही साहित्यकार का सच्चा दायित्व है। अलवर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जीवन सिंह ने कहा कि विचारशून्यता के कारण आज हम अतीतगामी हो रहे हैं। पश्चिम की आलोचना मात्र से हमारे अतीत का गौरव सिद्ध नहीं होता, बल्कि अपनी बुराइयों व रूढ़ियों का निष्पक्ष मूल्यांकन ही वास्तविक समाधान है। समारोह के दौरान प्रयास संस्थान की तरफ से वर्ष 2025 का घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार अलवर के डॉ. जीवन सिंह व 2026 का जयपुर के डॉ. हेतु भारद्वाज को दिया गया। वहीं रुक्मणि वर्मा युवा साहित्यकार पुरस्कार वर्ष 2025 के लिए भोजाण-राजगढ़ के सुनील लोहमरोड़ सोनू व 2026 के लिए पीलोड़ी-दौसा के मनीष मीणा को दिया गया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रेखाराम खीचड़, इतिहासकार प्रो. खेमचंद सोनी, पुरस्कृत साहित्यकारों के परिजन रामखिलारी मीणा, नारंगी मीणा, रजनीश भारद्वाज, सुरेंद्र कुमार जैन व प्रो. असगर वजाहत का भी सम्मान किया गया। जयपुर के साहित्यकार डॉ. हेतु भारद्वाज ने कहा कि लेखक के लिए सबसे बड़ी चुनौती खुद जिंदगी है। युवा साहित्यकार सुनील लोहमरोड़ सोनू ने काव्य प्रस्तुति के जरिए कहा कि आमंत्रण का सम्मान ही साहित्यकार की परीक्षा है। युवा लेखक मनीष मीणा ने कहा कि आज के दौर में जल, जंगल और जमीन के मुद्दों पर बात करते हुए वक्त को समझना युवा लेखन के समक्ष बड़ी चुनौती है। संस्थान अध्यक्ष डॉ. दुलाराम सहारण ने स्वागत भाषण दिया। संचालन सचिव कमल शर्मा ने किया। इस मौके पर डॉ. भरत ओला, सोहनलाल फगेड़िया, प्रो. एचआर ईसराण, प्रो. कमल सिंह कोठारी, प्रो. एलएन आर्य, प्रो. राजकुमार लाटा, रामरतन सिहाग, डॉ. कृष्णा जाखड़, विनीता स्वामी, गीता रावत, शबाना शेख, संतोष रणवा आदि उपस्थित थे। अब तक ये साहित्यकार हो चुके हैं अलंकृत : संस्थान अध्यक्ष डॉ. सहारण ने बताया कि प्रयास संस्थान की ओर से 2008 से यह समारोह किया जा रहा है। अब तक घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार से डॉ. सत्यनारायण, मनीषा कुलश्रेष्ठ, हेमंत शेष, रत्नकुमार सांभरिया, कमर मेवाड़ी, पल्लव, भगवान अटलानी, माधव हाड़ा, नंदकिशोर आचार्य, पद्मजा शर्मा, ऋतुराज, जवरीमल्ल पारख, विनोद पदरज, कृष्ण कल्पित व जितेंद्र भाटिया को सम्मानित किया जा चुका है। रुक्मणि वर्मा युवा साहित्यकार पुरस्कार से मिहिर पांड्या, गंगा सहाय मीणा, बलराम कांवट, संदीप मील, हर्षिल पाटीदार व डिंपल राठौड़ को सम्मानित किया जा चुका है।