वन विभाग बुद्ध पूर्णिमा पर शुक्रवार शाम 5 बजे से प्रदेश के जंगलों में वन्यजीवों की गणना करेगा। यह गणना वाटर होल पद्धति यानी पानी के स्रोतों पर निगरानी से की जाती है। भास्कर ने 2001 से 2025 तक की गणना के डेटा का एनालिसिस किया तो पता चला कि 2014 में 21,759 वन्यजीवों का अनुमान था, जो 2025 में बढ़कर 2 लाख 71,813 तक पहुंच गया। यानी 11 साल में 10 गुना बढ़ गए। प्रोटेक्टेड एरिया यानी सैंक्चुअरी/पार्क में 58,885, जबकि प्रोटेक्टेड एरिया से बाहर प्रादेशिक वन क्षेत्रों में 2,12,928 वन्यजीव मिले। यानी सैंक्चुअरी से 3 गुना ज्यादा वन्यजीव बाहर हैं। इसमें रणथंभौर, सरिस्का और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व को शामिल नहीं किया गया, क्योंकि वहां गणना का तरीका अलग है। वाटरहोल पद्धति; बुद्ध पूर्णिमा की चांदनी रात में जल स्रोतों के पास कर्मी मचान पर बैठकर वन्यजीवों की गिनती करते हैं। आधार यह है कि गर्मियों में हर वन्यजीव 24 घंटे में कम से कम एक बार पानी पीने जरूर आएगा। कभी अचानक बढ़े, कभी कम हुए?