टोडरा क्षेत्र में पिछले तीन महीनों से लेपर्ड का आतंक जारी है। मंगलवार रात रात लेपर्ड जंगल से निकलकर गुर्जर मोहल्ले की घनी आबादी में घुस गया। मंदिर के पास मकान की बाउंड्री में घुसे लेपर्ड की चपेट में आने से 7 साल का देवनारायण बाल-बाल बचा। बच्चे की मां की सतर्कता से उसकी जान बच गई। ग्रामीण आधी रात फलोदी रेंज कार्यालय पहुंचे इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। करीब 200 ग्रामीण आधी रात तक फलोदी रेंज कार्यालय पर डटे रहे। ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अधिकारियों का घेराव किया और लेपर्ड को पकड़ने की मांग की। ग्रामीण महिला सोनिया गुर्जर ने बताया कि उनके घर पर सामूहिक देवताओं के गीतों का कार्यक्रम चल रहा था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद महिलाएं अपने घर लौट चुकी थीं। इसी दौरान लेपर्ड मंदिर की दीवार फांदकर घर की बाउंड्री में घुस आया, जहां 7 साल देवनारायण घर के बाहर बैठा था। मां ने लेपर्ड देखते ही बच्चों को गोद में उठाया बच्चे की मां की नजर जैसे ही लेपर्ड पर पड़ी, उसने तुरंत बेटे को गोद में उठा लिया और शोर मचा दिया। लोगों की आवाज सुनकर लेपर्ड पीछे की दीवार कूदकर जंगल की ओर भाग निकला। यह घटना आबादी क्षेत्र में लेपर्ड के लगातार घुसने की समस्या को उजागर करती है। घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के केवल दो कर्मचारी मौके पर पहुंचे, जबकि कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार फलोदी रेंज चौकी प्रभारी सुमन गुर्जर को फोन किया, लेकिन उनके देर से पहुंचने पर लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया घटना से आक्रोशित करीब 200 ग्रामीण एक किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए फलोदी रेंज कार्यालय पहुंचे। वहां डेढ़ घंटे तक जमकर हंगामा किया गया। ग्रामीणों का आरोप था कि रेंज कार्यालय में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। बाद में डीएफओ ने 7 दिन में लेपर्ड को पकड़ने का आश्वासन दिया। हंगामे के दौरान ग्रामीणों ने फोन पर डीएफओ मानस सिंह से बात कर पूरी स्थिति बताई। डीएफओ ने सात दिन के भीतर लेपर्ड को पकड़ने का भरोसा दिया, लेकिन ग्रामीण मौके पर वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़े रहे।
रातभर चला सर्च ऑपरेशन
सूचना पर रवांजना डूंगर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। कुछ देर बाद चौकी प्रभारी सुमन गुर्जर भी रेंज कार्यालय पहुंचीं। ग्रामीणों ने उनका घेराव कर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग दोहराई। काफी समझाइश के बाद उन्होंने पूरी रात क्षेत्र में रहकर लेपर्ड को पकड़ने का प्रयास करने का आश्वासन दिया। इसके बाद वन विभाग ने घटनास्थल के पीछे पिंजरा लगाकर निगरानी शुरू कर दी।
रात करीब 12 बजे अशोक स्कूल के पीछे से गुजर रहे युवकों ने लेपर्ड को स्कूल की बाउंड्री फांदकर बाहर निकलते देखा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार लेपर्ड करीब आधे घंटे तक स्कूल के पीछे झाड़ियों में छिपा रहा, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत बनी रही।
सिनेमा हॉल कॉलोनी में गाय का किया शिकार
रात के दौरान लेपर्ड सिनेमा हॉल कॉलोनी पहुंच गया, जहां उसने एक गाय पर हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। पशुपालक जब दूध निकालने के लिए बाड़े में पहुंचा तो उसने लेपर्ड को गाय को खाते हुए देखा।
तीन महीने से दहशत
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से लेपर्ड लगातार आबादी में घूम रहा है। इस दौरान कई बार मवेशियों पर हमले हो चुके हैं और लोगों की जान जोखिम में पड़ चुकी है। बावजूद इसके वन विभाग अब तक लेपर्ड को पकड़ने में सफल नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि हर गुजरते दिन के साथ किसी बड़े हादसे का खतरा बढ़ता जा रहा है।