जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक की अध्यक्ष डॉ. सीमा अग्रवाल ने कहा कि एक ओर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की बात की जा रही है, वहीं यदि बालिकाएं बाल विवाह का शिकार होती हैं तो यह लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। अतः बाल विवाह की रोकथाम समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। दरअसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक द्वारा सात दिवसीय बाल विवाह प्रतिषेध सप्ताह बुधवार से शुरू हो गया है। इसमें शुभारंभ के बाद उद्घाटन सत्र के रूप में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक के मीटिंग हॉल में बाल विवाह रोकथाम विषय पर एक रणनीतिक सेमिनार, कार्यशाला और पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक की अध्यक्ष डॉ. सीमा अग्रवाल उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश कुमार जलुथरिया ने की। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कमल सोनी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। साथ ही सहायक कलेक्टर एवं कलेक्टर प्रतिनिधि देवेंद्र सिंह चौहान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल प्रसाद मीणा, सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग नवल खान सहित विभिन्न विभागों के अधिकारीगण एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। प्राधिकरण के सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया ने संबंधित विभागों के अधिकारियों, पंडित, मौलवी, हलवाई, कैटरर्स, प्रिंटिंग प्रेस प्रतिनिधि एवं अन्य हितधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी हितधारक अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए बाल विवाह की रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाएं। किसी भी संभावित बाल विवाह की सूचना तत्काल संबंधित प्राधिकरण को दें, आवश्यक रूप से न्यायिक मजिस्ट्रेट से निषेधाज्ञा जारी करवाई जाए तथा हेल्पलाइन नंबर 15100, 1098, 181 एवं 100 पर भी सूचित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी कारणवश स्वयं कार्रवाई करना संभव न हो, तो तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित किया जाए, ताकि समय रहते प्रभावी एवं कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर बाल विवाह प्रतिषेध, हेल्पलाइन सेवाओं एवं उपलब्ध कानूनी उपायों से संबंधित पोस्टर एवं लीफलेट का विमोचन किया गया, जिन्हें पैरा लीगल वॉलंटियर्स एवं विभिन्न विभागों के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया जाएगा। टोंक जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में जन-जागरूकता फैलाने के लिए एन.जी.ओ. सिकोइडिकॉन के सहयोग से बाल विवाह जागरूकता रथ को जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सीमा अग्रवाल, प्राधिकरण सचिव दिनेश कुमार जलुथरिया, सहायक निदेशक नवल खान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल प्रसाद मीणा एवं सिकोइडिकॉन के प्रभारी देवेंद्र जांगिड़ द्वारा संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ जिले में व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता फैलाएगा। सहायक कलेक्टर देवेंद्र सिंह चौहान ने प्रशासन द्वारा संचालित 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम की जानकारी दी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमल प्रसाद मीणा ने पुलिस विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता विभाग नवल खान ने जिले में बाल विवाह की स्थिति को गंभीर बताते हुए इसके प्रभावी उन्मूलन के लिए कड़े प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। एन.जी.ओ. सिकोइडिकॉन के टोंक प्रभारी देवेंद्र जांगिड़ ने बाल विवाह की सामाजिक जटिलताओं एवं इसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। सेमिनार के अंतर्गत आयोजित धर्मगुरुओं के सत्र में पंडित पवन सागर एवं अन्य मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बाल विवाह की सूचना मिलते ही प्राधिकरण को सूचित करने तथा ऐसे आयोजनों में शामिल नहीं होने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त हलवाई, कैटरर्स, प्रिंटिंग प्रेस प्रतिनिधियों एवं बैंड-बाजा संचालकों द्वारा भी सहयोग देने का आश्वासन व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सूबे सिंह यादव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, महिला अधिकारिता विभाग, चिकित्सा विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहे।