टोंक बस स्टैण्ड से| राजस्थान रोडवेज का ध्येय वाक्य ‘शुभास्ते पन्थानः सन्तु’ यानी आपकी यात्रा मंगलमय हो, टोंक डिपो के यात्रियों के लिए किसी क्रूर मजाक से कम नहीं है। यह संभवतः प्रदेश का सबसे अनोखा और बदहाल रोडवेज डिपो है, जहां जिला मुख्यालय से जुड़े 5 प्रमुख उपखण्ड मुख्यालयों (टोडारायसिंह, मालपुरा, पीपलू, निवाई और उनियारा) के लिए शाम 7 बजे के बाद एक भी रोडवेज बस उपलब्ध नहीं होती। हैरानी की बात यह है कि इनमें से निवाई और उनियारा जैसे कस्बे तो नेशनल हाईवे पर स्थित हैं, फिर भी यहां के बाशिंदों को रात के समय रोडवेज सेवा नसीब नहीं है। कहने को तो इस बस स्टैंड पर 4 टिकट विंडो बनाई गई हैं, लेकिन शाम 7 बजते ही यहां सन्नाटा पसर जाता है। यात्रियों को जानकारी देने, टिकट काटने या सहयोग करने वाला कोई नहीं मिलता। ये सूनी पड़ी खिड़कियां परिवहन मंत्री प्रेमचंद बैरवा के दावों और आदेशों की हवा निकाल रही हैं। कुछ महीने पहले निरीक्षण के दौरान मंत्री बैरवा ने यहां पर्याप्त स्टाफ तैनात करने के कड़े निर्देश दिए थे, लेकिन धरातल पर आज तक उनकी पालना नहीं हो सकी। बस स्टैंड का नजारा किसी आम आदमी की लाचारी को बयां करने के लिए काफी है। सुबह के 11 बजे हैं, स्टैंड पर करीब एक दर्जन बसें खड़ी हैं और सैकड़ों यात्री उमस और गर्मी में बेहाल होकर इंतजार कर रहे हैं। जयपुर मार्ग की टिकट विंडो के पास फर्श पर टोडारायसिंह निवासी रामधन गुर्जर अपना कट्टा सिरहाने रखकर लेटे हुए हैं। उनके ठीक पास एक आवारा सांड भी बैठा है। रामधन ने बताया कि वे काम निपटाकर आए तो पता चला कि अब दोपहर बाद ही टोडारायसिंह की बस मिलेगी, इसलिए यहीं सोने के अलावा कोई चारा नहीं था। पेंशन के काम से आए निवाई के नंदकिशोर, छावनी की कल्याणी और पीपलू के बृजराज भी घंटों से अपनी बस की राह देख रहे हैं। नंदकिशोर का दर्द है कि जयपुर के लिए हर 10 मिनट में बस निकलती है और वे निवाई बाइपास होकर जाती हैं। मात्र 25 मिनट का सफर घंटों के इंतजार में बदल गया है। उनियारा, टोडारायसिंह और पीपलू के लिए इक्का-दुक्का बसें ही बची हैं। यात्रियों को डर है कि अगर यह बस छूट गई, तो निजी बसों और जीपों में दोगुना किराया देकर सफर करना पड़ेगा।