टोंक के अलीगढ़ थाना क्षेत्र में जानलेवा हमले में घायल टीचर श्योदास मीणा की सालभर बाद मौत हो गई। हमले में उनके सिर में गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद से वे कोमा में थे। रविवार रात करीब 12 बजे जयपुर से जांच कराकर गांव लौटते समय जयपुर के शिवदासपुरा क्षेत्र में उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। टीचर पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपियों पर हत्या करने के जुर्म पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में पुलिस अब तक तीन आरोपियों में से एक को ही गिरफ्तार कर पाई है। वहीं, फरार दो आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित है। टीचर का मेडिकल जांच कराने में देरी को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे थे। परिजनों को इसके लिए हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा था। मृतक शिक्षक अलीगढ़ थाना क्षेत्र के अलीमपुरा गांव के रहने वाले थे। उनके वकील लाखन सिंह मीणा ने बताया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है। स्कूल के बाहर कहासुनी के बाद किया था हमला परिजनों के अनुसार, श्योदास मीणा बराना में टीचर थे और बाइक से स्कूल जाते थे। 3 अक्टूबर 2025 को स्कूल में दो युवकों से आपसी कहासुनी के बाद विवाद हो गया था। लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया था। आरोप है कि इसके बाद झगड़ा करने वाले युवकों और उनके साथियों ने टीचर पर हमला करने की प्लानिंग की और उनकी निगरानी करने लगे। उस दिन टीचर सवाई माधोपुर से घरेलू सामान लेकर देर रात लौट रहे थे। इसी दौरान गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बराना गांव के पास रास्ते में आरोपियों ने धारदार हथियारों से उन पर हमला कर दिया। अगले दिन वो पास के श्मशान में आधे-अधूरे कपड़ों में लहूलुहान हालत में मिले। ग्रामीणों ने इसकी सूचना परिजनों और पुलिस को दी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां से जयपुर रेफर कर दिया गया था। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण वे कोमा में चले गए। इसके बाद से उनका इलाज कभी अस्पताल तो कभी घर पर निजी डॉक्टर की निगरानी में चल रहा था। तीन दिन पहले परिजन उन्हें जांच के लिए जयपुर लेकर गए थे। वहां से लौटते समय उनकी मौत हो गई। FIR दर्ज, लेकिन कार्रवाई को लेकर उठे सवाल परिवाद के अनुसार, इस मामले में अलीगढ़ थाने में FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में राकेश कुमार पुत्र कन्हैयालाल मीणा, विजेंद्र पुत्र रामलाल मीणा, सांवलराम पुत्र रामबिलास मीणा और धारासिंह पुत्र रामसहाय मीणा के नाम सामने आए थे। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने अब तक केवल राकेश कुमार मीणा को गिरफ्तार किया है। वहीं, अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई। परिवार ने जांच अधिकारी एएसआई भंवरलाल मीणा की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान विजेंद्र मीणा का नाम संदिग्ध मानकर मामले से अलग कर दिया गया, जबकि पीड़ित पक्ष उसे घटना में शामिल बता रहा है। दो आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम पीड़ित पक्ष के अनुसार, जिला पुलिस अधीक्षक टोंक की ओर से सांवलराम मीणा और धारासिंह मीणा पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था। इसके बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होने पर परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। हाईकोर्ट तक पहुंचा था मामला पीड़ित पक्ष के अनुसार, वकील लाखन सिंह मीणा की पैरवी के बाद मामला राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर पहुंचा था। शिकायत में बताया गया- वर्तमान जांच अधिकारी और अलीगढ़ थानाधिकारी पुलिस निरीक्षक राजकुमार चौधरी को मेडिकल रिपोर्ट और जांच की रिपोर्ट के साथ न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। पीड़ित पक्ष के अनुसार, 30 मार्च को थानाधिकारी मेडिकल संबंधी रिपोर्ट और जांच की प्रगति रिपोर्ट के साथ हाईकोर्ट में उपस्थित हुए थे। परिवार का कहना है कि शिक्षक की चोटें गंभीर थीं और उनकी हालत बयान देने के लायक नहीं थी। टीचर की मौत के बाद जांच पर सवाल शिक्षक श्योदास मीणा की मौत के बाद तत्कालीन जांच अधिकारी एएसआई भंवरलाल मीणा, तत्कालीन थानाधिकारी पवन कुमार चौधरी और वर्तमान जांच अधिकारी सीआई राजकुमार चौधरी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार ने जांच प्रक्रिया, मेडिकल परीक्षण, आरोपियों की गिरफ्तारी और उपलब्ध साक्ष्यों पर उचित कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही का निर्धारण जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकेगा।