भास्कर संवाददाता | टोंक जिले और पूर्व टोंक रियासतकालीन परगनों के सैकड़ों हज यात्रियों को इस साल भी मदीना स्थित रुबातों में ठहरने की इजाजत नहीं मिल सकी है। उल्लेखनीय है कि टोंक रियासत की बेगमों ने हज यात्रियों की सुविधा के लिए करीब 100 साल पहले सऊदी अरब के मक्का और मदीना में रुबातें बनवाई थीं। वहां तब से ही टोंक रियासत के हज यात्रियों, साथ ही अन्य हज यात्रियों को भी निशुल्क ठहरने की इजाजत मिलती रही है। लेकिन कई कारणों से कभी-कभी निशुल्क ठहरने में रुकावट आई। पिछले तीन साल से मदीना की रुबातों में निशुल्क ठहरने की इजाजत नहीं मिल रही है। जबकि वक्फ की गई रुबातों में निशुल्क ठहराने का प्रावधान है। हालांकि गत वर्ष कर्नाटक और सिरोंज के करीब 240 हज यात्रियों को मदीना में भी निशुल्क ठहराया गया था। लेकिन टोंक के हज यात्रियों को लगातार तीन साल से मदीना की रुबातों में ठहरने की इजाजत नहीं मिल पा रही है। इजाजतनामा होने के बावजूद अनुमति नहीं मिल रही है। जबकि सर्वप्रथम उनका अधिकार था। इसका कारण सेंट्रल हज कमेटी और सऊदी अरब के जिम्मेदारों की तकनीकी वजहें और ढिलाई बताई जा रही है। इस संबंध में रुबात अथॉरिटी साहबजादा राहिल ने बताया कि गत वर्ष कर्नाटक और सिरोंज के हज यात्रियों को इजाजत मिल गई थी। इस बार किसी को नहीं मिली है। भोपाल, हैदराबाद सहित कई जगह की रुबातों में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। इसके लिए अब बड़े पैमाने पर आवाज उठाने की जरूरत महसूस हो रही है। इसके लिए आवश्यक प्रयास किए जाएंगे, ताकि आगे ऐसी परेशानी नहीं हो। मक्का की रुबातों में सबको ठहरने की इजाजत मिल जाएगी। गौरतलब है कि मक्का और मदीना की रुबातों में ठहरने की इजाजत मिलने के बाद एक हज यात्री को करीब 80 हजार से अधिक की राहत मिल जाती है। बेगमों की ये थी मंशा टोंक रियासत की बेगमों ने सऊदी अरब में टोंक रियासत के हज यात्रियों की सहूलियत के लिए मक्का एवं मदीना में रुबातें बनाई थी। वहां टोंक रियासत के परगने सिरोंज, छबड़ा, पिड़ावा, निम्बाहेड़ा सहित टोंक जिले के हज यात्रियों सहित अन्य जगह के हज यात्रियों को निशुल्क ठहरने की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन तीन साल से कुछ तकनीकी कारणों एवं व्यवस्था करने में ढिलाई की वजह से परेशानी हो रही है। इस बार भी मदीना की रुबातों में निशुल्क ठहरने की इजाजत नहीं मिल सकी। टोंक से करीब 127 हज यात्री गए हैं। हज के लिए टोंक के हज यात्री 24 अप्रैल को रवाना हुए थे।