शहर में दूध तलाई और नीमज माता के बाद अब गोगुंदा की वादियों में जिले का तीसरा रोपवे आकार लेने जा रहा है। जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर स्थित धोलियाजी बावजी को नए इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की कवायद सोमवार से धरातल पर शुरू हो गई। कलेक्टर गौरव अग्रवाल की बनाई गठित 4 सदस्यों वाली विशेष टीम ने पहाड़ी पर पहुंचकर रोपवे और अन्य पर्यटन सुविधाओं की संभावनाओं का मौका मुआयना किया। अधिकारियों ने बताया कि बजट घोषणा के तहत यहां रोपवे, इको-टूरिज्म और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान किया गया था। टीम अब फिजिबिलिटी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। यह रोपवे न केवल श्रद्धालुओं की राह आसान करेगा, बल्कि उदयपुर के पर्यटन मानचित्र पर गोगुंदा को एक क्लाउड पॉइंट के रूप में स्थापित करेगा। सर्वे करने वाली टीम में डीएफओ-उत्तर शैतान सिंह देवड़ा, पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक सुमिता सरोच, एसीएफ राजेंद्र सिंह, रेंजर जयवर्धन सिंह, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन तथा गोगुंदा बीडीओ शामिल रहे। काम होने के बाद बढ़ेंगे पर्यटक धोलियाजी बावजी की पहाड़ी समुद्र तल से 1200 मीटर ऊंची है। गोगुंदा क्षेत्र भी ऊंचाई पर स्थित है। ऐसे में रोपवे से अरावली की चोटियों का वह नजारा दिखेगा जो अब तक केवल पैदल ट्रैकिंग करने वालों को मिलता था। मानसून के दौरान यह पूरी पहाड़ी बादलों से घिर जाती है। अभी स्थानीय लोग और श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। रोपवे बनने के बाद यहां पर्यटकों की आमद कई गुना बढ़ने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट के तहत केवल रोपवे ही नहीं, बल्कि वन संरक्षण नियमों के भीतर रहते हुए पाथवे, ट्रेल और व्यू पॉइंट भी बनाए जाएंगे।