एसएमएस हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग में एक डॉक्टर के रिटायर होने के बाद किडनी ट्रांसप्लांट अटकने के मामले में चिकित्सा विभाग ने 5 डॉक्टरों की कमेटी गठित की है। कमेटी में डॉ. संजीव कुमार शर्मा, डॉ. सौरभ शर्मा, डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, डॉ. महेंद्र कुमार मीणा और डॉ. विक्रम पलसानिया शामिल हैं, जो उपचार-किडनी ट्रांसप्लांट की मॉनिटरिंग करेंगे। भास्कर में 26 जून को खबर प्रकाशित होने के बाद एसएमएस प्रशासन ने सुपर स्पेशियलिटी विंग की 5वीं मंजिल स्थित डॉ. धनंजय अग्रवाल के चैंबर का ताला खुलवाकर नेम प्लेट भी हटा दी। डॉ. धनंजय अग्रवाल एक महीने पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन चैंबर पर ताला और नेम प्लेट लगी हुई थी। दो साल में 44 किडनी ट्रांसप्लांट हुए शुक्रवार से किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया फिर शुरू होगी। नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा ने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए मेडिकल बोर्ड की बैठक होगी। इसमें मरीजों के ट्रांसप्लांट के लिए फिट या अनफिट होने पर निर्णय लिया जाएगा। साथ ही। जिन मरीजों की पूर्व अनुमति जारी हुई थी, उसकी वैधता भी जांची जा रही है कि उसी अनुमति से ऑपरेशन हो सकता है या नई अनुमति लेनी होगी। मरीजों का नियमित चेकअप व डायलिसिस जारी है। अजमेर जॉइन नहीं किया, अब SMS में ही डॉ. धनंजय अग्रवाल को एसएमएस से सेवानिवृत्ति के बाद पे माइनस पेंशन पर अजमेर मेडिकल कॉलेज में लगाने के आदेश जारी हुए थे, लेकिन उन्होंने वहां जॉइन नहीं किया। अब सरकार ने उन्हें वापस एसएमएस में लगाने के आदेश जारी किए हैं। एक साल में 40 से ज्यादा किडनी ट्रांसप्लांट हुए। डॉ. धनंजय को पहले अजमेर लगाने के आदेश हुए थे, लेकिन अब उन्हें एसएमएस में ही लगाया जा रहा है। -गजेंद्र सिंह खींवसर, चिकित्सा मंत्री