क्षेत्र में तापमान 44 डिग्री पहुंच गया है। भीषण गर्मी पड़ रही है। तेज धूप है। लू चल रही है। जनजीवन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पेड़ आमजन के लिए जीवनदायिनी सहारा बनकर उभर रहे हैं। पेड़ों की ठंडी छांव लोगों को राहत दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में राहगीर पेड़ों के नीचे रुक रहे हैं। किसान भी छांव में विश्राम कर रहे हैं। स्थानीय लोग भी पेड़ों के नीचे बैठकर गर्मी से बचाव कर रहे हैं। केवल इंसान नहीं। पशु-पक्षी भी घनी छांव में राहत महसूस कर रहे हैं। मवेशी भी पेड़ों के नीचे ठहर रहे हैं। पेड़ों की हरियाली ने प्राकृतिक ठंडक दी है। इससे एक बार फिर साबित हुआ कि प्रकृति मानव जीवन की बड़ी संरक्षक है। इस दौर में आसोतरा क्षेत्र के लोगों ने पेड़ों की महत्ता को और अधिक समझा है। पेड़ ऑक्सीजन देते हैं। गर्मी से बचाव करते हैं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं। जीव-जंतुओं के संरक्षण में भी भूमिका निभाते हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि पेड़ों का संरक्षण जरूरी है। अधिक से अधिक वृक्षारोपण समय की बड़ी आवश्यकता है। इससे आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिलेगा। प्राकृतिक छांव भी मिलेगी। आसोतरा में पेड़ों ने संदेश दिया कि पेड़ हैं तो जीवन है।