उदयपुर नगर निगम परिसर में शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए निगम का घेराव किया। शहर की बिगड़ती हालत और निगम में फैले कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा बोर्ड को जमकर घेरा। कांग्रेस के निवर्तमान पार्षदों और पूर्व पार्षदों ने निगम की कार्यशैली के खिलाफ नारेबाजी की। नगर निगम परिसर में गुरुवार सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक धरना चला। दोपहर तक नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना निगम नहीं पहुंचे तो कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आयुक्त के चैंबर के बाहर नारे लगाए। करीब 4 बजे आयुक्त खन्ना चैंबर में पहुंचे, तभी एक दर्जन से ज्यादा पदाधिकारी अंदर पहुंचे। इस दौरान जब पदाधिकारी खड़े होकर ज्ञापन दे रहे थे, तभी एक कार्यकर्ता के कुर्सी पर चढ़ने से खन्ना नाराज हो गए। उन्होंने नाराजगी जताई तो पदाधिकारी भी बहस करने लगे। इस गुस्से में आए आयुक्त खन्ना ने ज्ञापन लेने से मना कर दिया और कुर्सी से कुछ पीछे आए। 5 मिनट तक बहस के बाद लिया ज्ञापन पदाधिकारी जब खड़े होकर ज्ञापन दे रहे थे, तभी एक कार्यकर्ता के कुर्सी पर चढ़ने से नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना नाराज हो गए। उन्होंने नाराजगी जताई तो पदाधिकारी भी बहस करने लगे। इस गुस्से में आए आयुक्त खन्ना ने ज्ञापन लेने से मना कर दिया और कुर्सी से कुछ पीछे आए। करीब 5 मिनट तक बहस के बाद आयुक्त खन्ना शांत हुए और कांग्रेसी पदाधिकारियों से ज्ञापन लिया। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने विकास कार्यों के नाम पर घोटालों के आरोप लगाए और बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हार के डर से निकाय चुनाव जानबूझकर टाले जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर अब गड्ढों और गंदगी का केंद्र बन चुका है। ज्ञापन से पहले करीब 1 घंटे तक चैंबर के बाहर कांग्रेसी पदाधिकारी इंतजार करते रहे। नए वार्ड ही नहीं, पुराने शहर की गलियों में भी गंदगी के ढेर वक्ताओं ने कहा- उदयपुर की जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। शहर की सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जिससे वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। केवल नए वार्ड ही नहीं बल्कि पुराने शहर की गलियों में भी गंदगी के ढेर लगे हैं। सीवरेज की समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि नालियां जाम है और सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। पर्यटन नगरी होने के बावजूद यहां आने वाले पर्यटकों को बदहाली का सामना करना पड़ रहा है। विकास और लाइटों के नाम पर घोटाले का आरोप पदाधिकारियों ने आयड़ नदी के सौंदर्यीकरण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर विधायक ताराचंद जैन द्वारा विकास की बड़ी-बड़ी बातें तो की जा रही हैं, लेकिन असलियत में वहां घोटालों का खेल चल रहा है। शहर की स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। इससे रात में अंधेरा रहता है, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है। सबसे बड़ा मुद्दा 272 प्लॉट घोटाले का उठा था। इसमें आरोप लगाया गया कि जांच को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है और बड़े नेताओं को बचाने की कोशिश हो रही है। नगर निगम के चुनाव टालने पर सरकार को घेरा शहर जिलाध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा- भाजपा के बोर्ड में नगर निगम पूरी तरह फेल साबित हुआ है। लोग बदबू और गंदगी के बीच जीने को मजबूर हैं। राठौड़ ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार निगम चुनाव को क्यों टाल रही है ? उन्होंने चेतावनी दी कि अब कांग्रेस जनता के हक के लिए निर्णायक संघर्ष करेगी। राठौड़ का कहना है कि अगर जल्द ही व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस प्रदर्शन में पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, पंकज शर्मा, दरियाव सिंह चुंडावत, जगदीशराज श्रीमाली समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। धरने में युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, सेवादल और NSUI के कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।