चित्तौड़गढ़ जिले में बाइक सवार युवक के सीने में 9 इंच लंबा लोहे का पाइप आर-पार हो गया। 4 सेमी मोटा और 9 इंच लंबा पाइप पसलियों को तोड़ते हुए फेफड़े को चीरकर गर्दन तक पहुंच गया था। युवक को युवक को उदयपुर के एमबी अस्पताल के सुपर स्पेशियलिटी में लाया गया। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर पाइप निकाल कर युवक की जान बचाई। हादसा बेगूं क्षेत्र के चेची रोड पर 24 अप्रैल को शाम को हुआ था। जूनी बेगूं निवासी दीपक खटीक (32) बाइक से जा रहा था। सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गया। जिसमें से लोहे का पाइप दीपक के सीने में घुस गया था। डॉक्टर्स टीम ने 24 अप्रैल को 4 घंटे ऑपरेशन कर सफलतापूर्वक पाइप को निकालकर दीपक की जान बचाई। डॉक्टर्स ने बताया- सफल सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति अब स्थिर है और वह सही हो रहा है। सड़क किनारे खड़े ट्रैक्टर-टॉली से हुआ था हादसा चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र के चेची रोड पर 24 अप्रैल को सड़क किनारे खड़े खराब ट्रैक्टर-ट्रॉली से बाइक टकरा गई थी। ट्रॉली में टेंट का सामान और लोहे के पाइप रखे हुए थे। इनमें से कुछ पाइप बाहर निकले हुए थे। अंधेरा और बैक लाइट नहीं होने से बाइक सवार ट्रॉली को समय पर देख नहीं पाए और टकरा गए। टक्कर के दौरान ट्रॉली से बाहर निकला एक लोहे का पाइप दीपक खटीक (30) के सीने में घुस गया। बाइक पर सवार दूसरा युवक बस्सी निवासी असलम भी घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पसलियां तोड़ते हुए फेफडे़ को चीरकर गर्दन तक पहुंच गया था पाइप दीपक के सीने में घुसा पाइप इतना लंबा था कि मौके पर उसे कटर से काटना पड़ा। वहीं ज्यादा खून बहने के कारण दीपक को बेहोशी की हालत में हॉस्पिटल में लाया गया था। एमबी अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. कुशल गहलोत ने दीपक का सीटी स्कैन किया। जिसमें पता चला कि 4 सेमी मोटा और 9 इंच लंबा पाइप पसलियां तोड़ते हुए फेफड़े को चीरकर गर्दन तक पहुंच गया था। इससे सबक्लेवियन धमनी और शिरा भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिससे फेफड़ों में भारी रक्तस्राव (हीमोथोरेक्स) हो गया था। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. विनय नैथानी के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। सावधानीपूर्वक सर्जरी कर एल आकार के पाइप को शरीर से निकाला गया। इसके बाद क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं की मरम्मत (वैस्कुलर रिपेयर), फेफड़े का इलाज और टूटी पसलियों को जोड़ा गया। आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन ने बताया- इस तरह के ‘इम्पेलमेंट इंजरी’ मामलों में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है, लेकिन समय पर सही निर्णय और टीमवर्क से जीवन बचाया जा सका। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे हादसों में घाव पर दबाव डालना मददगार हो सकता है, लेकिन शरीर में घुसी वस्तु को कभी भी खुद निकालने का प्रयास नहीं करना चाहिए।