उदयपुर जिले के ऋषभदेव के कल्याणपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार को झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा ग्रामीण इलाके में बिना डिग्री और लाइसेंस के मरीजों को हैवी एंटीबायोटिक दवाएं और इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। इससे ग्रामीणों की जान को सीधा खतरा पैदा हो रहा था। सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य के निर्देश पर टीम ने पुलिस के साथ मिलकर बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे 6 अवैध क्लीनिकों पर छापेमारी की। ब्लॉक सीएमओ डॉ. यशपाल भगोरा ने बताया कि इन क्लीनिकों के पास इलाज करने से जुड़े कोई भी वैध दस्तावेज नहीं मिले हैं। इन 6 क्लीनिकों पर हुई छापेमारी, दो पर बोर्ड तक नहीं था सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने इस कार्रवाई के लिए विशेष संयुक्त टीम बनाई। इसमें जिला क्षय अधिकारी डॉ. प्रणव भावसार, बीसीएमओ डॉ. यशपाल भगोरा, डॉ. रितेश असोड़ा और डॉ. मनोज कुमार मीणा शामिल थे। टीम ने कल्याणपुर थाना पुलिस की मदद से इलाके में चल रहे सरस्वती क्लीनिक, योगित क्लीनिक, सत्यम क्लीनिक और जनता ऑर्थो क्लीनिक पर दबिश दी। इनके अलावा दो ऐसे अवैध क्लीनिक भी पकड़े गए, जो पहचान छिपाने के लिए बिना किसी नाम और बोर्ड के चलाए जा रहे थे। बिना लाइसेंस रखे थे इंजेक्शन, खुले में फेंक रहे थे मेडिकल कचरा जांच के दौरान सामने आया कि सभी छह क्लीनिक बिना क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट सर्टिफिकेट के चल रहे थे। यहां एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने के लिए कोई भी कानूनी कागज या डॉक्टर की डिग्री नहीं थी। तलाशी में इन दुकानों से बिना लाइसेंस के रखी गई भारी मात्रा में अंग्रेजी दवाइयां, एंटीबायोटिक्स और इंजेक्शन बरामद किए गए। इसके अलावा इस्तेमाल की गई सीरिंज और मेडिकल कचरा (बायो-मेडिकल वेस्ट) भी नियमों को ताक पर रखकर खुले में ही फेंका जा रहा था। ग्रामीणों की सेहत के साथ खिलवाड़, संक्रमण फैलने का खतरा बिना जांच के हाई डोज एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड के इंजेक्शन देने से मरीजों की किडनी और लिवर खराब होने का जोखिम रहता है। वहीं, खुले में पड़े संक्रमित मेडिकल कचरे से आसपास के लोगों और मवेशियों में भी गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ था। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि आम लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।