पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल में दलौदा-मंदसौर के बीच चल रहे डबलिंग के काम के कारण तीन ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द कर दी गई हैं। इनमें उदयपुर सिटी-मंदसौर, मंदसौर-उदयपुर सिटी और रतलाम-उदयपुर सिटी रेलसेवा शामिल हैं। इस फैसले का सीधा असर चित्तौड़गढ़ जिले के यात्रियों पर पड़ने वाला है, क्योंकि ये ट्रेनें जिले के कई जरूरी स्टेशनों से होकर गुजरती हैं और रोजाना बड़ी संख्या में लोग इन पर निर्भर रहते हैं। दलौदा-मंदसौर के बीच काम के कारण बदला रेल संचालन उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि दलौदा और मंदसौर स्टेशनों के बीच ट्रैक दोहरीकरण का काम किया जा रहा है, जो भविष्य में रेल यातायात को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। लेकिन इस काम के चलते फिलहाल ट्रेनों के संचालन में बदलाव करना पड़ा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा और काम को समय पर पूरा करने के लिए यह फैसला लिया गया है। इन ट्रेनों का संचालन ऐसे रहेगा प्रभावित गाड़ी संख्या 59836 उदयपुर सिटी-मंदसौर ट्रेन 7 मई को उदयपुर सिटी से चलकर केवल नीमच तक ही जाएगी और नीमच से मंदसौर के बीच यह सेवा रद्द रहेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 59835 मंदसौर-उदयपुर सिटी ट्रेन 8 मई को मंदसौर के बजाय नीमच से चलाई जाएगी, जिससे मंदसौर से नीमच के बीच यह ट्रेन नहीं चलेगी। इसके अलावा गाड़ी संख्या 19327 रतलाम-उदयपुर सिटी ट्रेन 8 मई तक रतलाम के स्थान पर नीमच से संचालित होगी और रतलाम-नीमच के बीच आंशिक रूप से रद्द रहेगी। चित्तौड़गढ़ के लिए क्यों जरूरी हैं ये ट्रेनें ये तीनों ट्रेनें चित्तौड़गढ़ जिले के लिए बहुत जरूरी हैं, क्योंकि ये जिले के कई छोटे और बड़े स्टेशनों को सीधे जोड़ती हैं। 59836 और 59835 ट्रेनें भूपालसागर, कपासन, पांडोली, नेतावल, घोसुंडा, चित्तौड़गढ़ जंक्शन, शंभूपुरा, गंभीरी रोड और निंबाहेड़ा जैसे स्टेशनों से होकर गुजरती हैं। वहीं 19327 ट्रेन निंबाहेड़ा, चित्तौड़गढ़ और कपासन पर रुकती है। इन ट्रेनों के जरिए स्टूडेंट्स पढ़ाई के लिए, व्यापारी अपने काम के लिए, और मरीज इलाज के लिए बड़े शहरों तक आसानी से पहुंचते हैं। डेली चलने वाली ये ट्रेनें जरूरी है। रद्द होने से यात्रियों और व्यापार पर पड़ेगा असर इन ट्रेनों के आंशिक रूप से रद्द होने का सबसे ज्यादा असर रोजाना यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ेगा। यात्रियों को अब वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ेगा, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा छोटे व्यापारियों को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि वे इन ट्रेनों के जरिए अपने सामान की आवाजाही करते हैं।