उदयपुर में दीपावली से पहले गुरुवार को नगर निगम ने शहर के रेलवे स्टेशन के सामने बनी कच्ची बस्ती में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। महापौर पारस सिंघवी और निगम के पुलिस निरीक्षक मांगीलाल की मौजूदगी में अतिक्रमण निरोधी दस्ते ने जेसीबी चलाकर घरों के बाहर और मुख्य सड़क तक किए गए कब्जों को हटाया। महापौर ने खुद सड़क पर खड़े होकर अतिक्रमण हटवाया। इस कार्रवाई के दौरान सामान टूटने से बस्ती के लोग भड़क गए और महापौर से बहस करने लगे। महिलाओं ने कहा कि दीपावली पर सामान बेचने के लिए रखा था, सब टूट गया। पुलिस ने बीच-बचाव कर मामला शांत करवाया। सामान टूटने पर महापौर से भिड़े लोग अभियान के तहत नगर निगम की टीम रेलवे स्टेशन के सामने सालों से बसी अस्थाई बस्तियों को हटाने पहुंची थी। टीम ने वहां रखे सामान को हटाना शुरू किया, तो उसमें टूट-फूट होने से बस्ती के लोग नाराज हो गए। गुस्साए लोगों ने मौके पर मौजूद महापौर पारस सिंघवी को खरी-खोटी सुनाई, जिससे वहां माहौल गर्मा गया। इस दौरान पुलिस ने महापौर से बहस कर रहे एक युवक को पकड़कर दूर हटाया। बस्तीवासियों का आरोप- दो से तीन घरों को नुकसान पहुंचाया कार्रवाई के बाद बस्ती के लोगों ने आरोप लगाया कि नगर निगम की इस कार्रवाई में दो से तीन घरों के आगे के हिस्सों को नुकसान पहुंचा है और उनके साथ मारपीट भी की गई है। बस्ती की महिलाओं का कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं। जब उन्होंने यहां भराव डालकर घर बनाए थे, तब जंगल था और किसी ने उन्हें नहीं रोका। अब दीपावली के त्यौहार पर उन्होंने बेचने के लिए बाहर सामान रखा, तो निगम ने उसे तोड़ दिया। महिलाओं ने कहा कि उन्हें बिलिया गांव में शिफ्ट करने की बात कही जा रही है, लेकिन वहां कोई सुविधा नहीं होने से वे वहां जाकर क्या करेंगे। निगम बोला- किसी झोपड़ी को नहीं तोड़ा, सिर्फ सड़क के कब्जे हटाए वहीं, नगर निगम के निरीक्षक मांगीलाल ने घरों को तोड़ने और मारपीट करने के आरोपों को गलत बताया है। अतिक्रमण निरोधी दस्ते ने किसी भी झोपड़ी या घर को नुकसान नहीं पहुंचाया है और न ही किसी व्यक्ति के साथ मारपीट की गई है। डांगी ने बताया कि बस्ती के लोगों ने अपनी झोपड़ियों के आगे बांस और तिरपाल लगाकर मुख्य सड़क तक सामान रख दिया था, जिससे आने-जाने का रास्ता रुक रहा था। निगम की टीम ने कार्रवाई करते हुए केवल सड़क के आगे किए गए इन्हीं अस्थाई कब्जों और सामान को वहां से हटाया है।