परिवहन विभाग में 7 डिजिट नंबर घोटाले के खुलासे के बाद 493 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया। यानी सरकारी रिकॉर्ड में ये वाहन अब वैध नहीं हैं, ना ही सड़कों पर चल सकते हैं, लेकिन हकीकत में कई गाड़ियां आज भी उन्हीं नंबर प्लेट के साथ सड़कों पर दौड़ रही हैं। वाहन मालिक साफ कह रहे हैं कि वे इन नंबरों को नहीं हटाएंगे। आरसी निरस्त होने के बाद भी ऑनलाइन पोर्टल पर ये गाड़ियां एक्टिव हैं। यानी की इन गाड़ियों का आरसी निरस्तीरकण कागजों तक ही सिमट कर रह गया। जांच में सामने आया कि इन नंबरों को बैकलॉग, री-असाइनमेंट, ट्रांसफर और रिन्यूअल जैसे प्रोसेस के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए दोबारा जिंदा किया गया। परिवहन मुख्यालय के आदेश पर हुई जांच में पता चला कि कई नंबर नियमों के खिलाफ अपात्र लोगों को दे दिए गए। इसके बाद मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 55(5) के तहत आरसी निरस्त कर दी गई। एक्सीडेंट का जिम्मेदार कौन, चालान भी नहीं बनेगा कई हाई-डिमांड नंबर आवंटित करवाए गलत तरीके से कई हाई डिमांड नंबर आवंटित करवा लिए गए। ये वही नंबर हैं, जो आमतौर पर लाखों में बिकते हैं। यानी गड़बड़ तकनीकी की नहीं, पैसों और पहुंच ने की है। ये वो वीआईपी नंबर हैं, जिनकी आरसी निरस्त हो गई, लेकिन वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।