उदयपुर की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था विद्या प्रचारिणी सभा के चेयरमैन की तरफ से बनाई गई एडहॉक कमेटी और वर्तमान प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। मामले में चित्तौड़गढ़ के पूर्व जिला प्रमुख और सभा सदस्य भेरूसिंह चौहान ने कहा कि सभा के पदेन अध्यक्ष (नाथद्वारा विधायक विश्वराजसिंह मेवाड़) ने वर्तमान सभा को खारिज करते हुए एडहॉक कमेटी बना दी। जबकि उन्हें ऐसा कोई पावर नहीं है। वे हमारे लीगल सदस्य नहीं है। हम मर्यादा के कारण उनको सहन कर रहे हैं। वहीं, कुम्भलगढ़ विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ बोले- ये राजतंत्र नहीं है, लोकतंत्र है। कोई कितना ही बड़ा आदम हो, लोकतंत्र से ही चलना पड़ेगा। अब आदेशों की पालना कोई करने वाला नहीं है। बता दें, एडहॉक कमेटी वर्तमान प्रबंधन से चार्ज लेने और आॅडिट कराने पर अड़ी हुई है लेकिन वर्तमान कार्यकारिणी इसे गलत ठहराते हुए सहमत नहीं है। चार्ज लेने गए तो इन्होंने ऑफिस के ताले जड़ दिए: कच्छावा वहीं, दूसरी ओर एडहॉक कमेटी सदस्य नरेन्द्र सिंह कच्छावा ने कहा- पूर्व कार्यकारिणी की तरफ से हमें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। हम बुधवार को सुबह से शाम तक सभा परिसर में डटे रहे लेकिन एडहॉक कमेटी चेयरमैन युवराज सिंह झाला को चार्ज नहीं दिया गया। हमारा उद्देश्य संस्था की ऑडिट करवाना है लेकिन ये मूल मुद्दे से भटकाना चाहते हैं। हम यहां पहुंचे तो ऑफिस के ताले जड़ दिए। गुरुवार को हम वापस चार्ज लेने का प्रयास करेंगे। पूर्व कार्यकारिणी से फिर अनुरोध करते हैं कि एडहॉक कमेट को चार्ज सौंपे। 54 नए सदस्य जोड़ने को लेकर शुरू हुआ था विवाद बता दें, वर्तमान प्रबंधन का कार्यकाल 12 फरवरी 2026 को समाप्त हो चुका था। इसके बाद चुनाव होने थे लेकिन वर्तमान प्रबंधन द्वारा 54 नए सदस्यों को जोड़ने को लेकर विवाद हो गया था। इसमें परिवारवाद के आरोप लगे थे। ऐसे में जो सभा के सदस्य नहीं बन सके, वे कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सभा के प्रधान संरक्षक और अध्यक्ष विश्वराज सिंह मेवाड़ इस संबंध में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके बाद प्रधान संरक्षक ने 3 सदस्यीय एडहॉक कमेटी का गठन किया था, जिन्हें ऑडिट कराने की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद 12 अप्रैल को एडहॉक कमेटी में 8 सदस्य और जोड़े गए। जिन्हें पूर्व कार्यकारिणी से चार्ज लेने और ऑडिट कराने के लिए कहा गया है।