प्रदेश में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल और विरोध के बाद अब वाहनों में वीएलटीडी (व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस) लगना शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार ने 23 कंपनियों को इसकी जिम्मेदारी दी है। प्रत्येक वीएलटीडी सिस्टम के लगने से सरकार को 1 हजार रुपए का राजस्व प्राप्त हो रहा है। फिलहाल बाजार में वीएलटीडी लगाने पर करीब 8 हजार रुपए का खर्च आ रहा है। इससे पहले वीएलटीडी नहीं होने पर बड़ी संख्या में वाहनों के परमिट का नवीनीकरण रुक गया था और चालान भी बनने लगे थे। ट्रक संचालकों के विरोध के बाद सरकार ने नियमों में बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। जिला परिवहन अधिकारी मुकेश डाड ने बताया कि सोमवार को पहले ही दिन परिवहन विभाग ने 95 वीएलटीडी अप्रूव किए हैं। अधिकृत कंपनियां वाहनों में वीएलटीडी सिस्टम लगाने का कार्य करती हैं, जबकि परिवहन विभाग केवल सिस्टम का अनुमोदन (अप्रूवल) करता है। एक दर तय हो... अभी 6 हजार से 8 हजार तक वसूल रही कंपनियां ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व विधिक सलाहकार नरेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार ने वीएलटीडी लगाने की कोई अधिकतम दर तय नहीं की है। इसी कारण अलग-अलग कंपनियां 6 हजार से 8 हजार रुपए तक शुल्क वसूल रही हैं। उन्होंने कहा कि वाहन स्वामियों के हित में सरकार को इसकी एक समान दर निर्धारित करनी चाहिए, ताकि मनमानी वसूली पर रोक लग सके। नई एसओपी जारी: परिवहन विभाग ने ट्रक व्यवसाय से जुड़े वाहन स्वामियों और ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं के समाधान के लिए वीएलटीडी संबंधी नई एसओपी जारी कर दी गई है। 13 जुलाई को जारी एसओपी के तहत वीएलटीडी को ओपन मार्केट में उपलब्ध कराया गया है, जिससे एकाधिकार समाप्त करने का प्रयास किया गया है। विभाग का दावा है कि इससे वाहन स्वामी कम समय और उचित दर पर डिवाइस लगवा सकेंगे। समिति गठित... समस्याओं का समाधान करेगी परिवहन विभाग ने ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय समिति गठित करने का भी निर्णय लिया है। समिति सभी मांगों का विधिक परीक्षण कर अनुशंसा के आधार पर कार्रवाई करेगी। इसके अलावा प्रादेशिक व जिला परिवहन कार्यालय स्तर पर प्रत्येक माह के प्रथम सोमवार को वाहन मालिकों व ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के साथ बैठक कर शिकायतों का निस्तारण किया जाएगा। जिला स्तर पर समाधान नहीं होने वाले मामलों को मुख्यालय भेजकर निराकरण कराया जाएगा। विभागीय लक्ष्य... सभी पात्र वाहनों को जोड़ेंगे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद 5 लाख से अधिक व्यावसायिक वाहनों में वीएलटीडी लगाया जाएगा। इसमें ट्रक, बस, टैक्सी, स्कूल बस, एंबुलेंस और अन्य परमिटधारी वाहन शामिल हैं। परिवहन विभाग के अनुसार सभी पात्र वाहनों को ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी, परमिट संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नियमों के पालन की ऑनलाइन मॉनिटरिंग आसान होगी।