भास्कर न्यूज | बाड़मेर बाड़मेर जिले की रामसर पंचायत समिति का पादरिया गांव भ्रष्टाचार की एक ऐसी प्रयोगशाला बन गया है, जहां विकास की ईंट रखे बिना ही लाखों रुपए का भुगतान उठा लिया जाता है। पादरिया ग्राम पंचायत में संगठित फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। इसमें सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी ने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को लगभग 20 लाख रुपए तक की चपत लगाई है। जिला परिषद की एक विशेष टीम द्वारा 9 कार्यों के भौतिक सत्यापन में यह खौफनाक सच सामने आया है कि जिन सुविधाओं का पैसा बहुत पहले उठ चुका है, उनका गांव में बाड़मेर. फर्जीवाड़े से उठाई गई राशि। राउमावि. पादरिया में 2023-24 में स्मार्ट क्लास बोर्ड के लिए 7 लाख रुपए स्वीकृत हुए। पंचायत ने महज एक बोर्ड थमाकर पूरे 7 लाख रुपए उठा लिए। बाजार में इसकी कीमत सिर्फ 1.50 लाख है। न कोई बिल लगाया गया, न एनओसी ली गई। साथ में दिए जाने वाले 18 अन्य आइटम भी गायब कर दिए गए। इसी स्कूल में 3 लाख रुपए से सोलर प्लांट लगाया जाना था। 5 दिसंबर 2024 को पूरे 3 लाख रुपए निकाल लिए गए। मौके पर आज तक कोई प्लांट लगा ही नहीं है। सीनियर स्कूल पादरिया से पादरिया पार-2 तक 5 लाख रुपए की लागत से सीसी सड़क बननी थी। सड़क का एक पत्थर नहीं लगा। पूरा भुगतान ठेकेदार और जिम्मेदारों की जेब में चला गया। आंगनबाड़ी पादरिया के पास सार्वजनिक शौचालय 60 हजार रुपए और राउमावि. में पिंक टॉयलेट 40 हजार रुपए के पैसे उठा लिए गए। मौके पर कोई निर्माण नहीं हुआ। राउप्रावि. चांदानियों का पार में 2022-23 में बने ओपन जिम में सरकारी दरों से कहीं ज्यादा रेट पर 8 आइटम खरीदे गए। ओसमान फौजी के घर के पास सार्वजनिक वाचनालय की चारदीवारी का निर्माण निजी उपयोग के लिए किया गया। पादरिया में इससे पूर्व 2021-22 में भी 2.46 लाख रुपए फर्जी तरीके से उठाने का मामला सामने आया था। जब जिला परिषद के अधिशासी अभियंता प्रदीप कुमार, वरिष्ठ लेखाधिकारी देवपाल मीना, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी पूनमचंद और सहायक विकास अधिकारी मदनलाल की टीम मौके पर पहुंची, तो पंचायत का असली खेल सामने आया। अधिकारियों को गुमराह करने के लिए अधिकांश पत्रावलियां ही गायब कर दी गई थीं। जांच कमेटी ने इसे सीधे तौर पर रिकॉर्ड खुर्द-बुर्द करना माना है।