ढाई साल के भीतर एक ही कंपनी से 40 विला-कॉटेज खरीदने के मामले में भास्कर के खुलासे के 24 घंटे के भीतर सरकार ने एसीएस शिखर अग्रवाल को एपीओ कर दिया। इसके कारणों की पड़ताल की तो सामने आया कि सरकार के लिए यह मामला सिर्फ संपत्ति की खरीद का ही नहीं है, बल्कि पद पर रहते हुए नियमों को दरकिनार करने और हितों के टकराव का भी है। सामने आया कि शिखर ने दो पदों पर रहते हुए नियम तोड़े, जिनसे रिसॉर्ट वाली कंपनी को सीधा फायदा हुआ। इसका सिलसिला 2006 में शुरू हुआ था, जब शिखर अग्रवाल उदयपुर के कलेक्टर थे। उन्होंने राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (आरएसपीसीबी) के चेयरमैन रहते हुए भी नियम दरकिनार किए। भास्कर ने 27 अक्टूबर के अंक में शिखर, आईपीएस पत्नी प्रशाखा और परिजनों द्वारा एक ही कंपनी से ढाई साल में 40 विला-कॉटेज खरीदने का मामला उजागर किया था। परिवार ने अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा में 20 कॉटेज खरीदे थे। इस पर 6 करोड़ 16.5 लाख रुपए खर्च हुए। खरीद के बाद इन्हें गोयल फैशंस को लीज पर दे दिया। बुझड़ा के कॉटेज 4 लाख रुपए और अजबगढ़ के 5 लाख रुपए प्रति विला सालाना के हिसाब से लीज पर दिए गए। 2006 में कलेक्टर थे; कन्वर्जन किया, निर्माण की शर्त बदली 24 नवंबर 2006 को शिखर अग्रवाल ने उदयपुर कलेक्टर रहते बुझड़ा में अनंता रिसॉर्ट की 13.70 हे. भूमि का पर्यटन इकाई में कन्वर्जन किया था। कन्वर्जन का आदेश 11 शर्तों के अधीन था। 28 अक्टूबर 2007 को शिखर ने एक अहम शर्त विलोपित कर दी। इस शर्त के अनुसार, कंपनी को वरिष्ठ नगर नियोजक (उदयपुर) से अनुमोदित प्रोजेक्ट रिपोर्ट व ले-आउट प्लान के आधार पर निर्माण कार्य का कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना था। इस शर्त को हटाने के लिए कंपनी के डायरेक्टर ने 26 अक्टूबर को कलेक्टर को आवेदन दिया था और महज दो दिन में ही इसे मंजूर कर लिया गया। इसके तहत कंपनी को यह छूट दी गई कि वह पर्यटन विभाग के आयुक्त द्वारा अनुमोदित बिल्डिंग प्लान के अनुसार निर्माण कार्य कर सकती है। 2024 में RSPCB के चेयरमैन थे, बिना पड़ताल किए सीटीओ दिया कोई भी रिसॉर्ट शुरू करने से पहले आरएसपीसीबी से कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) अनिवार्य होता है। इसके लिए वन विभाग की एनओसी और प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट जरूरी है। कंपनी ने एनओसी नहीं दी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट की जगह सीटीई के समय लगाया बिल्डिंग प्लान दिया। बोर्ड ने कंपनी से सीटीओ और सीटीई के लिए जरूरी वन विभाग का दूरी प्रमाण-पत्र भी नहीं लिया। इसमें प्रोजेक्ट की क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट और इको-सेंसिटिव जोन से दूरी दर्शाई जाती है। बोर्ड ने बिना पड़ताल 24 दिसंबर 2024 को सीटीओ जारी कर दिया। उस समय शिखर अग्रवाल के पास ही आरएसपीसीबी के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार था। 2026 में उद्योग-निवेश के एसीएस थे, विशेष पैकेज का सामूहिक फैसला हुआ शिखर अग्रवाल, प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर ने 27 मार्च 2026 को अजबगढ़ रिसॉर्ट में 20 विला खरीदे। इसी दिन वित्त विभाग ने आदेश निकाला, जिसमें गोयल फैशंस कंपनी को अजबगढ़ रिसॉर्ट के लिए राजस्थान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन स्कीम-2019 में विशेष पैकेज दिया। इसे 14 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट की बैठक में मंजूरी दी गई थी। बैठक की अध्यक्षता सीएम ने की थी और शिखर इसमें उद्योग व निवेश विभाग के एसीएस के तौर पर शामिल हुए थे। कंपनी को 10 साल तक स्टेट टैक्स पर 75% सब्सिडी और विद्युत शुल्क में 100% छूट जैसी कई रियायतें दीं। पति-पत्नी अमेरिका में, 12 नवंबर को लौटेंगे… शिखर और प्रशाखा निजी यात्रा पर विदेश में हैं। दोंनों कार्मिक विभाग से… 3 सप्ताह की छुट्टी लेकर गए हैं। 12 नवंबर को लौटेंगे। भास्कर ने 26 अक्टूबर को शिखर का पक्ष जानने के लिए बात की तो उन्होंने बताया कि वो अभी छुट्टी पर हैं और अमेरिका आए हैं। -पेज 8 भी पढ़ें