बाड़मेर जिले की लाइफलाइन कहे जाने वाले बाड़मेर-जोधपुर हाईवे (NH-25) पर वन विभाग करोड़ों रुपए खर्च कर हरियाली बिछाने की तैयारी कर रहा है। लेकिन एनएचएआई और वन विभाग के बीच भविष्य के रोडमैप को लेकर तालमेल की कमी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हाईवे की सेंटर लाइन से महज 10 मीटर की दूरी पर मेड़बंदी कर सघन पौधरोपण किया जा रहा है। यदि भविष्य में हाइवे को फोरलेन किया जाता है, तो इन पौधों का कटना निश्चित है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जनता के करोड़ों रुपए महज कुछ समय बाद फिर से विकास की बलि चढ़ा दिया जाएगा। 16 करोड़ से 109 किमी में विकसित होगी हरित पट्टी: पहले एनएचएआई ने पौधे लगाए जो जल गए, अब यह जिम्मेदारी वन विभाग के पास है। विभाग एनएच-25, एनएच-68 और एनएच-754 के किनारे 109 किलोमीटर में पौधरोपण कर रहा है। इसमें 5 से 6 साल तक पौधों की देखभाल का पूरा बजट शामिल है। अकेले बाड़मेर-बागुंडी हाईवे पर 20,600 पौधे लगाने का लक्ष्य है। वन विभाग की ओर से बाड़मेर जिले के बाड़मेर-बागुंडी, बाड़मेर- धोरीमन्ना, बाड़मेर-शिव सहित कई हाइवे के किनारे पौधे लगाए जा रहे हैं। हाइवे की सेंटर लाइन से महज 10 मीटर की दूरी पर मेड़बंदी करके पौधे लगाए गए हैं। फोर लेन की संभावना खत्म या फिर कटेंगे पेड़: वन विभाग ने हाइवे की सेंटर लाइन से महज 10 मीटर की दूरी पर मेड़बंदी करके पौधारोपण शुरू कर दिया है। बाड़मेर-जोधपुर हाइवे को फोर-लेन किए जाने की मांग वर्षों से लंबित है। यह हाईवे जिले की लाइफलाइन है। ऐसे में हाईवे को फोर-लेन करने का निर्णय लिया जाता है, तो इन पौधों का क्या होगा? बाड़मेर अब देश की 'ऊर्जा राजधानी' है। यहां पचपदरा रिफाइनरी, मंगला टर्मिनल और विशाल विंड-सोलर पार्क हैं। रिफाइनरी के कारण हाइवे पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में भविष्य की जरूरत फोरलेन हाइवे है। 10 मीटर की दूरी पर पौधे लगाकर विभाग ने अनजाने में फोरलेन विस्तार की संभावनाओं को ही फिलहाल सीमित कर दिया है।