भास्कर न्यूज | टोंक जिले के वन क्षेत्रों में आयोजित वन्यजीव गणना अभियान इस बार मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच संपन्न हुआ। वैशाख पूर्णिमा पर शुक्रवार शाम 5 बजे शुरू हुआ यह 24 घंटे का सर्वे शनिवार शाम 5 बजे पूरा हुआ। इस दौरान आसमान में छाए बादल, तेज हवाएं, बारिश ने कई बार गणना कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया। कार्यवाहक उपवन संरक्षक (एसीएफ) अनुराग महर्षि ने बताया कि टोंक, निवाई, मालपुरा, उनियारा, देवली, बीसलपुर कंजरवेशन रिजर्व सहित छह रेंज में फैले करीब 33 हजार हैक्टेयर वन क्षेत्र में 24 घंटे तक गणना कार्य किया गया। हालांकि वन्य प्राणियों की गणना के आंकड़े जिलेभर से संकलित किए जा रहे हैं। इसमें 5 दिन का समय लग सकता है। महर्षि ने बताया कि शुक्रवार शाम से ही आसमान में छाए बादलों के चलते पूर्णिमा की रोशनी का फायदा वनकर्मियों को नहीं मिल सका। कई घंटों तक बादल, तेज हवाओं, बरसात के बावजूद वनकर्मियों ने मोर्चा संभाले रखा। शनिवार को भी दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच वनकर्मी अपने निर्धारित स्थानों पर डटे रहे।वन्यजीव गणना के दौरान हिंसक जानवरों से कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित खतरों को देखते हुए कई स्थानों पर ऊंचे मचान तैयार करवाए गए थे। वहां से वनकर्मी सुरक्षित रहते हुए जानवरों की निगरानी कर सके। इसके अलावा कर्मचारियों को लाठी सहित अन्य जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए गए थे। इससे किसी भी आपात स्थिति में जंगली जानवरों को डराकर दूर किया जा सके। टोंक में सीमित संसाधनों के साथ-साथ स्टाफ की कमी के बावजूद वन्यजीव सर्वे का काम पूरा किया गया। टोंक रेंजर अभिषेक भटनागर और सदर वन नाका प्रभारी विक्रम शर्मा ने बताया कि गणना के दौरान सियार, जरख (हायना), मोर सहित अन्य कई प्रकार के वन्यजीव दिखाई दिए। शनिवार को भी मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं रहा। दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच वनकर्मी अपने-अपने निर्धारित स्थानों पर डटे रहे। कार्यवाहक उपवन संरक्षक (एसीएफ) अनुराग महर्षि ने बताया कि गणना के दौरान एकत्र किए गए आंकड़ों का संकलन और विश्लेषण किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में लगभग 5 दिन का समय लगेगा। इसके बाद जिले में मौजूद वन्यजीवों की संख्या और प्रजातियों की स्थिति को लेकर आधिकारिक आंकड़े जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा, यह गणना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।