सलोनी पांडे पैरों में कांच और कीलें चुभने से घायल 50 वर्षीय हथिनी ‘ऐमा’ अब अपने दर्दनाक अतीत से निकलकर नई जिंदगी जी रही है। कभी झारखंड के धनबाद में उसे भीख मंगवाने के लिए महावत भूखा-प्यासा रखकर सड़कों पर घुमाता था। पैरों की गंभीर चोटों के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पाती थी, लेकिन उसकी हालत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। धनबाद के एक पशु प्रेमी की सूचना पर वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस ने जनवरी 2021 में ऐमा का रेस्क्यू कर मथुरा के चुरमुरा स्थित एलिफेंट कंजर्वेशन एंड केयर सेंटर में पहुंचाया। यहां इलाज और देखभाल के बाद उसे ‘ऐमा’ नाम दिया गया। अब वह सुरक्षित माहौल में आजादी का जीवन जी रही है। यह केंद्र 2010 में स्थापित देश का पहला विशिष्ट हाथी अस्पताल व पुनर्वास केंद्र है, जहां वर्तमान में 34 हाथियों की देखभाल की जा रही है। संस्था ने हाथियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हुए मोबाइल हाथी क्लीनिक भी शुरू किया है, जो मौके पर उपचार देता है। साथ ही ‘बेगिंग एलिफेंट’ अभियान के तहत सड़कों पर शोषित हाथियों को बचाकर उनका पुनर्वास किया जा रहा है। हर साल 16 अप्रैल को ‘हाथी बचाओ दिवस’ मनाकर हाथियों के संरक्षण और उनके प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाता है। सर्कस में नचाने के साथ रखता था भूखा: तमिलनाडु के हथिनी को एक सर्कस में महावत के इशारे पर नचाने के लिए कई-कई महीनों भूखा रखा जाता था। शिकायत मिलने के बाद रेस्क्यू कर अप्रैल 2016 में सेंटर लाए । जहां हथिनी का नाम रिया रखा। उत्तराखंड में एक भीषण रेल दुर्घटना में 9 महीने की मादा हथिनी की बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी। तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से पटरी से गिरकर उसके पिछले पैर लकवाग्रस्त हो गए थे। सेंटर पर लाने के बाद हथिनी का नाम बानी रखा और पशु चिकित्सक की मदद से एक्यूपंक्चर, विशेष पूरक आहार देकर ठीक करने के प्रयास किया गया। मंदिर के बाहर जंक फूड खिलाते : महाराष्ट्र के मुलुंद रेलवे स्टेशन के पास स्थित मंदिर के बाहर हथिनी आशीर्वाद देने को खड़ा किया जाता था। बदले में लोग उसे जंक फूड खिलाते थे जिस कारण उसका वजन उसकी लंबाई से 1000 किलो अधिक बढ़ गया।