खाड़ी देशों में सालाना 50 हजार टन बीकानेरी भुजिया समेत अन्य आइटम्स जाते हैं, लेकिन युद्ध के कारण करीब 100 कंटेनर निर्यात ठप हो गया है। एक कंटेनर में 25 टन माल आता है। दुबई व अन्य देशों में कंटेनर फंस गए हैं। दुबई के क्रूज टर्मिनल पोर्ट राशिद बंदरगाह पर कंटेनर का किराया भी 120 डॉलर से बढ़कर 2200 डॉलर तक पहुंच गया है। बीकाजी फूड के मैनेजर शंभुदयाल गुप्ता ने बताया कि हर महीने 15 से 20 कंटेनर भुजिया, पापड़ और नमकीन का एक्सपोर्ट होता है, जो फिलहाल बंद है। इसके अलावा अन्य देशों में हर महीने करीब 80 कंटेनर माल भेजा जाता है। वो भी अटका हुआ है। कुछ दिन ऐसे ही हालात रहे तो भुजिया, पापड़ की कीमतों में 3 रु. प्रति किलो का उछाल आ सकता है। अभी नमकीन उत्पादन पर असर नहीं है। वहीं, नोखा के प्रमुख एक्सपोर्टर राजेश कुमार झंवर ने बताया कि हमने 850 डॉलर में कंटेनर किराए पर लेकर जीरा, मेथी दाना, मूंगफली दाना इराक भेजे थे, लेकिन माल बीच में ही कहीं उतार दिया गया। अब शिपिंग कंपनी वॉर चार्ज के नाम पर 4 हजार डॉलर मांग रही है। मिडिल ईस्ट में ऊन के कंटेनर अटके: युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में ऊन के कंटेनर अटक गए हैं। ऊन व्यवसायी ऋषभ बोथरा ने बताया कि बीकानेर में 700-800 कंटेनर ऊन मिडिल ईस्ट से आता है। 11 मार्च को कुछ कंटेनर पहुंचे हैं, जो होर्मुज पर फंसे हुए थे। अभी भी काफी कंटेनर बीच में ही अटके हुए हैं। वॉर चार्ज के नाम पर शिपिंग कंपनियां काफी पैसा मांग रही हैं। उन्होंने बताया कि युद्ध की वजह से बीकानेर का कारपेट उद्योग भी प्रभावित हुआ है।