जिला स्तरीय स्टेकहोल्डर्स कार्यशाला का शुक्रवार को सीएमएचओ कार्यालय, सभागार में सीएमएचओ डॉ. शैलेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। जिला क्षय निवारण केंद्र टोंक व ममता हेल्थ इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड के संयुक्त तत्वावधान में पीडियाट्रिक टीबी परियोजना के तहत आयोजित कार्यशाला में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा करते हुए बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान और उपचार को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. हिमांशु मित्तल ने जिले में उपचाराधीन टीबी मरीजों को जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं व भामाशाहों के सहयोग से नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध कराने के अधिकारियों को निर्देश देकर कहा कि सभी नि-क्षय मित्र मरीजों के दवा सेवन की निगरानी भी सुनिश्चित करें, ताकि उपचार बीच में बाधित न हो। बैठक में संदिग्ध टीबी मरीजों की जांच, टीबी नोटिफिकेशन, उपचार सफलता दर, ड्रग ससेप्टिबिलिटी टेस्ट (डीएसटी), निक्षय पोषण योजना तथा पोषण किट वितरण की ब्लॉकवार समीक्षा की गई। सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को नि-क्षय मित्र बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। कार्यशाला में बच्चों में टीबी की शीघ्र पहचान के लिए क्यूआर कोड आधारित रेफरल प्रणाली की जानकारी दी गई। नवरत्न जैन ने बताया कि 14 साल से कम आयु के संभावित मरीजों को इस व्यवस्था के माध्यम से त्वरित जांच एवं उपचार से जोड़ा जा सकेगा। बैठक में एचआईवी/एड्स कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई व लंबित लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए गए।