अजमेर में रक्षाबंधन पर शहर में जहां भाई-बहन के रिश्ते की खुशियां घर-घर नजर आईं। वहीं अजमेर की दोनों जेलों में इस त्योहार की तस्वीर भावुक कर देने वाली रही। सेंट्रल जेल में बहनें जेल की सलाखों के पीछे बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं तो हाई सिक्योरिटी जेल में भी परिवार की महिलाएं अपने भाइयों तक राखी लेकर पहुंचीं। इस दौरान भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए बहन की आंखों में आंसू छलक पड़े। कहीं बच्चों के मासूम सवाल ने पिता को खामोश कर दिया। इस दौरान सेंट्रल जेल में अपने भाई को राखी बांधने पहुंची उर्मिला भावुक हो गई। उर्मिला ने कहा- मेरा भाई 12 महीने से जेल में बंद है। आज का दिन बहुत दुख दे रहा है। त्योहार पर वह घर पर नहीं है। यहां तो बस कुछ देर की औपचारिक मुलाकात है। भगवान से यही दुआ है कि मेरा भाई जल्द रिहा होकर घर वापस आए। वहीं हाई सिक्योरिटी जेल में 100 बंदियों में से सिर्फ 17 की बहनें राखी बांधने पहुंचीं। 83 बंदियों की कलाइयां त्योहार के दिन भी सूनी रहीं। सेंट्रल जेल: बहन और भाई दोनों की आंखें नम हुईं सेंट्रल जेल में रक्षाबंधन पर विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई। बहनों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े। इसके लिए सुबह से ही बंदियों को मुख्य गेट के पास बुलाया गया। बहनों ने भाइयों को राखी बांधी। मिठाई खिलाई और करीब 2 मिनट तक बातचीत की। राखी बांधते समय बहन और भाई दोनों की आंखें नम हो गईं। कुछ मिनट की मुलाकात में परिवार और घर की यादें बातचीत का हिस्सा रहीं। सेंट्रल जेल अधीक्षक आर. अनंतेश्वर ने बताया- रक्षाबंधन को देखते हुए विशेष मुलाकात की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने कहा- रक्षाबंधन भाई को बेहतर इंसान और समाज का जिम्मेदार नागरिक बनने का संकल्प दिलाने का भी पर्व है। जेल की चारदीवारियों के बीच कुछ मिनट की मुलाकात में किसी ने भाई की रिहाई की दुआ की तो किसी ने उसे अपराध छोड़कर नई जिंदगी शुरू करने की समझाइश दी। हाई सिक्योरिटी जेल: 100 में सिर्फ 17 की कलाई सजी, 83 की कलाइयां सूनी हाई सिक्योरिटी जेल में रक्षाबंधन पर अलग ही तस्वीर दिखाई दी। यहां 100 बंदियों में से करीब 85 अति सुरक्षा श्रेणी, गैंगवार से जुड़े और हार्डकोर प्रकृति के हैं। त्योहार के दिन इनमें से सिर्फ 17 बंदियों की बहनें राखी बांधने जेल पहुंचीं। बाकी 83 बंदियों के लिए रक्षाबंधन भी सामान्य दिन जैसा रहा। जिन बंदियों से मिलने परिवार पहुंचा, वहां भावनाएं खुलकर सामने आईं। कहीं बहनों की आंखों में आंसू थे तो कहीं बच्चों के सवालों ने पिता को अंदर तक झकझोर दिया। पांच बहनों का इकलौता भाई... राखी बांधते ही सबकी आंखें भर आईं ब्यावर के पास एक गांव से पांच बहनें अपने इकलौते भाई को राखी बांधने पहुंचीं। भाई अति सुरक्षा श्रेणी में बंद है। लंबी सुरक्षा जांच और इंतजार के बाद जब बहनें भाई के सामने पहुंचीं तो सभी की आंखें भर आईं। पांचों बहनों ने एक-एक कर भाई की कलाई पर राखी बांधी। भाई भी भावुक हो गया और खुद को रोक नहीं पाया। ‘भाई भी वर्दी पहनता था... पता नहीं कौन सा बुरा वक्त आया’ बालोतरा जिले से आई दो बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए कहा- हमारा भाई भी कभी वर्दी पहनता था। पता नहीं कौन सा बुरा वक्त आया कि आज पांच साल से जेल के अंदर है। बस एक बार बाहर आ जाए, फिर उसे अपराध की दुनिया में वापस नहीं जाने देंगे। बच्चों ने पूछा- ‘पापा, घर कब आओगे?’ केकड़ी क्षेत्र के एक बंदी से मिलने उसके बच्चे भी जेल पहुंचे। पिता को सामने देखकर बच्चों ने मासूमियत से पूछा- ‘पापा, घर कब आओगे? अब हमें बार-बार यहां नहीं आना। हमें आपके साथ रहना है।’ बच्चों के सवाल के बाद पिता कुछ देर तक खामोश रहा। सलाखों के उस पार खड़े बच्चों ने उसे यह अहसास कराया कि अपराध की सजा सिर्फ बंदी नहीं, बल्कि पूरा परिवार भी भुगतता है। गैंगस्टर की मुंहबोली बहन ने संभाली परिवार की जिम्मेदारी किशनगढ़ क्षेत्र के एक बड़े गैंगस्टर को राखी बांधने उसकी मुंहबोली बहन भी जेल पहुंची। बंदी ने बताया- मेरे जेल जाने के बाद उसके बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी इसी बहन ने संभाली है। राखी बांधने के बाद दोनों के बीच अपराध से दूर होकर नई जिंदगी शुरू करने को लेकर बातचीत हुई। ‘थोड़ा संयम रख लेते तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता’ उदयपुर के एक चर्चित मामले के मुख्य आरोपियों से मिलने पहुंचीं बहनें भी भावुक हो गईं। राखी बांधते समय उन्होंने भाइयों से कहा- उस समय थोड़ा संयम रख लेते, थोड़ा सोच लेते तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। इसी तरह चर्चित गैंग से जुड़े एक बंदी से मिलने पहुंची परिवार की महिलाओं ने भी उसे अपराध की दुनिया छोड़ने की समझाइश दी। उनकी बातें सुनते हुए बंदी की आंखें भी नम हो गईं।