बारां की एक महिला टीचर ने शिक्षक दिवस पर देहदान करने का प्रण लिया। यह संकल्प लेकर उन्होंने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की। एक शिक्षक जीवन पर्यंत समाज और विद्यार्थियों को ज्ञान का प्रकाश देकर उनका भविष्य संवारता है, लेकिन बारां की एक रिटायर्ड महिला टीचर ने भावी पीढ़ी के निर्माण का संकल्प लेकर एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। राजपुरा वार्ड निवासी सेवानिवृत्त शारीरिक शिक्षिका सुदर्शना दुबे ने शिक्षक दिवस के अवसर पर मरणोपरांत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए अपनी देह दान करने का प्रण लिया। शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से आयोजित इस देहदान संकल्प कार्यक्रम के दौरान सुदर्शना दुबे ने घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर कर संस्थान को सौंपा। इस निर्णय में उनके परिवार ने भी पूर्ण सहमति जताई। राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी भी रहीं सुदर्शना दुबे इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए पूर्व शारीरिक शिक्षिका और राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी रहीं सुदर्शना दुबे ने कहा कि एक शिक्षक के रूप में जीवन भर बच्चों के भविष्य निर्माण का कार्य किया है। अब इच्छा थी कि सेवानिवृत्ति और जीवनोपरांत भी यह नश्वर देह भावी पीढ़ी के ही काम आए। बारां में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हो चुकी है, जहां अध्ययनरत मेडिकल छात्रों को शोध व प्रायोगिक अध्ययन के लिए देह की अत्यंत आवश्यकता होती है। यदि मेरे शरीर के अध्ययन से कोई विद्यार्थी एक कुशल डॉक्टर बनकर आगे चलकर जिंदगियां बचाता है, तो मेरा शिक्षिका और मानव रूप में जीवन सार्थक हो जाएगा