राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी पार्टी के प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। दरअसल, नॉमिनेशन के आखिरी दिन सोमवार को भीलवाड़ा में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल जमा होने से रह गए। अब 70 वार्डों वाले निगम में कांग्रेस के 53 ही अधिकृत प्रत्याशी हैं। मामले में कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे समय पर पहुंचे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने सिंबल लेने से इनकार कर दिया। जबकि अधिकारी का तर्क है कि सिंबल तय समय-सीमा के बाद दिए गए, इसलिए नहीं लिए गए। कांग्रेस नेताओं ने देर रात तक कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और बाद में कोर्ट में जाने की बात कहकर प्रदर्शन खत्म कर दिया। अब ऐसे में सवाल है कि क्या 17 प्रत्याशी चुनाव से बाहर हो जाएंगे। पढ़िए… क्या कहते हैं लीगल एक्सपर्ट पूरे मामले में भास्कर ने लीगल एक्सपर्ट से बात की। जिला बार कौंसिल के पूर्व अध्यक्ष एडवोकट राजेश शर्मा बताते हैं- कोई भी पार्टी हो, कोई भी संस्था हो, कोई भी व्यक्ति हो, उसके पास पूरा अधिकार है कि वह कोर्ट में जा सकता है। जहां-जहां भी न्याय का हनन होगा, किसी के अधिकारों का हनन होगा, वह कोर्ट की शरण ले सकता है। लेकिन इस मामले में जहां एक बार चुनावी अधिसूचना जारी हो चुकी है, तो चुनाव की प्रक्रिया रोक नहीं जा सकती है, जब तक कोई विशेष कारण न हो। ऐसा नगर पालिका अधिनियम में वर्णित है। इस मामले में जहां तक कानूनी बचाव कि बात है तो रिलीफ मिलेगा या नहीं मिलेगा, यह तथ्यों पर निर्भर करेगा। समय पर सिंबल दिया या नहीं दिया, यह साक्ष्य का विषय है। अब समझें… नॉमिनेशन के दिन क्या हुआ कांग्रेस के कुछ नेता करीब पौने तीन बजे कांग्रेस प्रत्याशियों के आधिकारिक सिंबल लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। ये सिंबल खाली थे। कांग्रेस नेता नाम लिखने लगे और इनके बीच कुछ वार्डों के सिंबल को लेकर जमकर विवाद हुआ। इसी दौरान वहां मौजूद दो वकीलों में जमकर गाली-गलौज भी हुई। सिंबल और प्रत्याशी का नाम तय करने में 3:16 मिनट हो गए और जब कांग्रेस के नेता अपनी लड़ाई से फ्री होकर रिटर्निंग ऑफिसर व अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रतिभा देवठिया के पास पहुंचे तो उन्होंने समय सीमा पूरी होने का हवाला देते हुए सिंबल लेने से इनकार कर दिया। प्रत्याशी बोला- पार्टी के कहने पर ही पर्चा भरा था इस मामले में वार्ड 39 के पार्षद प्रत्याशी इदरीस ने बताया कि चुनाव की घोषणा होने के साथ ही मैंने वार्ड में प्रचार-प्रसार का काम शुरू कर दिया था। अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के कहने पर मैंने वार्ड नंबर 39 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में आवेदन कर दिया था। कल जब मैं जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और अधिकृत प्रत्याशियों की लिस्ट चेक की तो उसमें मेरा नाम नहीं था। तब मुझे पता चला कि कांग्रेस के पदाधिकारी यहां सिंबल देने आए थे, लेकिन निर्वाचन विभाग ने सिंबल लेने से मना कर दिया है। यह सरासर लोकतंत्र की हत्या है। लोकतंत्र में एक मतदाता भी तय समय के भीतर अगर मतदान केंद्र के अंदर आ जाता है तो उसे वोट देने से वंचित नहीं रखा जाता है। यह तो सिंबल की प्रक्रिया थी, इसे तो हर हालत में पूरा किया जाना था।