बीकानेर नगर निगम चुनाव में भाजपा नेता और यूआईटी के पूर्व चेयरमैन महावीर रांका के टिकट को लेकर विवाद हो गया है। टिकट नहीं मिलने के बावजूद वार्ड संख्या 75 से नामांकन दाखिल करने वाले रांका ने कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से नामांकन दाखिल नहीं किया, बल्कि पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों के फोन आने के बाद ही पर्चा भरा था। रांका ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 30 अगस्त की शाम भाजपा के निकाय चुनाव प्रभारी सत्यप्रकाश आचार्य का फोन आया था। उन्होंने नामांकन दाखिल करने के लिए कहा था। इसके बाद 31 अगस्त की सुबह शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने फोन कर जल्द नामांकन दाखिल करने को कहा, क्योंकि बाद में भीड़ बढ़ने की बात कही गई थी। रांका के अनुसार, इसके बाद पार्टी के विधि प्रकोष्ठ से भी फोन आया। उन्हें सलाह दी गई कि नामांकन दाखिल करने से पहले पर्चा चेक करवा लें, ताकि कोई गलती न रह जाए। रांका ने कहा कि इन तीन अधिकृत फोन कॉल के बाद ही उन्होंने नामांकन दाखिल किया। 'बगावत करनी होती तो निर्दलीय पर्चा भरता' रांका ने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से नामांकन दाखिल कर पार्टी के खिलाफ बगावत की है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें बगावत करनी होती तो वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अलग से पर्चा दाखिल कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मामले में पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों का कहना है कि जब पार्टी ने महावीर रांका को प्रत्याशी नहीं बनाया था, तो फिर पार्टी के पदाधिकारियों ने उन्हें नामांकन दाखिल करने के लिए क्यों कहा? वहीं भाजपा के चुनाव सह प्रभारी महावीर सैनी का कहना है कि जब महावीर रांका को टिकट दिया ही नहीं गया, तो टिकट कटने का सवाल ही नहीं उठता। अगर टिकट दिया जाता और बाद में बदल दिया जाता, तब इसे टिकट कटना कहा जा सकता था। सैनी के इसी बयान पर रांका ने अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी के अधिकृत पदाधिकारियों के निर्देश के बाद ही नामांकन दाखिल किया था। हालांकि बीकानेर पूर्व और बीकानेर पश्चिम के विधायकों द्वारा उनका विरोध करने के सवाल पर रांका ने जवाब देने से मना कर दिया। विधानसभा के बाद दूसरी बार टिकट से निराशा बता दें कि महावीर रांका इससे पहले विधानसभा चुनाव में बीकानेर पूर्व सीट से टिकट की दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी ने सिद्धि कुमारी को प्रत्याशी बनाया था। उस समय रांका ने शक्ति प्रदर्शन भी किया था, हालांकि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया था। इस बार नगर निगम चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें पार्षद प्रत्याशी नहीं बनाया। हालांकि रांका ने कहा कि भाजपा के साथ हैं और वे हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे। हालांकि मामले को लेकर बीकानेर के अलावा जयपुर भाजपा प्रदेश मुख्यालय से भी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।