दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे बनने के बाद शराब तस्करों ने हरियाणा से मेवाड़ तक सप्लाई का नया कॉरिडोर तलाश लिया है। जांच में सामने आया कि एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के बाद लंबे हिस्से में बार-बार टोल और पुलिस चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ता। एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि एसओजी जयपुर की सूचना पर चित्तौड़गढ़ के पास हरियाणा नंबर के ट्रक से 18,576 शराब के पव्वे और बीयर कैन जब्त किए गए। इनमें रॉयल चैलेंज के 173, पार्टी स्पेशल के 180, ऑल सीजंस के 34 और किंगफिशर बीयर के 120 कार्टन थे। ट्रक में 507 कार्टन शराब थी, जबकि पीछे पुलिस को गुमराह करने के लिए बिस्किट के 50 कार्टन रखे थे। एसओजी के एसआई डोडीराम, कांस्टेबल राकेश व नरेश ने ट्रक का पीछा कर कार्रवाई की। जांच मांगलवाड़-चित्तौड़गढ़ पुलिस को सौंपी गई है। एक्सप्रेस-वे पर खड्डे नहीं होने से शराब की बोतलें टूटने का डर भी नहीं रहता। एक्सप्रेस-वे से उतरने के बाद खेप को स्थानीय सड़क नेटवर्क से चित्तौड़गढ़ या उदयपुर ले जाने की संभावना है। टोल से ज्यादा चेकिंग से बचने का फायदा चालक रिंकू कुम्हार, 25, निवासी देवनगर-भिवानी हरियाणा ने बताया कि वह हरियाणा से शराब लेकर चित्तौड़गढ़ और उदयपुर में तय स्थान तक पहुंचाता था। एक चक्कर के करीब 2 लाख रुपए मिलते थे। वह करीब एक साल से नेटवर्क के लिए काम कर रहा था। उसके जरिए करीब 200 करोड़ रुपए की शराब सप्लाई का दावा है। पिछले एक साल में ट्रक के हरियाणा से मेवाड़ आने की जानकारी जुटाई जा रही है। चंडीगढ़ के पास शराब लदान के बाद रिंकू को ढाबे पर ट्रक सौंपा, ताकि उसे लदान स्थान पता न चले। ट्रक एक्सप्रेस-वे से टोंक के उनियारा, बूंदी-बिजौलिया होते हुए चित्तौड़गढ़ पहुंचा। उदयपुर के आगे बिछीवाड़ा में इसे खाली कर पिकअप से गुजरात के दाहोद-हिम्मतनगर के आदिवासी इलाके से होते हुए गुजरात पहुंचाना था। 60 लाख रुपए की शराब को गुजरात में 140 करोड़ रुपए में बेचने की बात सामने आई है।