बालोतरा | शहर के तेरापंथ भवन स्थित अमृत सभागार में साध्वी मंगलप्रज्ञा के बालोतरा चातुर्मास के दौरान चल रही तपस्या की श्रृंखला में श्राविका संतोष भंडारी ने सिद्धि तप संपन्न कर पच्चक्खाण किया। इस अवसर पर तप अनुमोदन समारोह आयोजित किया गया। साध्वी मंगलप्रज्ञा ने कहा कि कठिन तपस्या संकल्प व मनोबल से पूरी होती है। संतोष भंडारी के संकल्प बल को साधुवाद देते हुए उन्होंने कहा कि तप में शरीर बल की अपेक्षा मनोबल आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तप इंद्रिय विजय की कठिन साधना और आत्मा की पवित्र आराधना है। इससे कर्म निर्जरा के साथ आत्मिक शक्ति का संवर्धन होता है। तप का उम्र से कोई संबंध नहीं है। तपस्वी अपनी भावना और संकल्प के बल पर आगे बढ़ता है, हालांकि इसमें पारस्परिक सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने भंडारी परिवार को भी तप के लिए प्रेरित किया तथा 5 सितंबर से शुरू होने वाली ग्यारह रंगी तपस्या में सहभागी बनने का आह्वान किया। दीपिका भंडारी ने सास संतोष भंडारी की तपस्या की वर्धापना में कविता प्रस्तुत की। साध्वियों ने सामूहिक संगान से तप की अनुमोदना की। सभा मंत्री मोहन बाफना ने बधाई दी। पूर्वाध्यक्ष महेंद्र वेदमुथा ने साध्वी प्रमुखा का संदेश पढ़ा, जबकि अध्यक्ष राणमल फोला मेहता ने तप अभिनंदन पत्र का वाचन किया। सभा की ओर से साहित्य व अभिनंदन पत्र भेंट कर संतोष भंडारी का सम्मान किया गया। चातुर्मास में अठाई, नौ, ग्यारह, मासखमण, वर्षीतप और एकांतर तप सहित कई तप चल रहे हैं।