नगर परिषद चुनाव में मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ प्रत्याशियों ने जनसंपर्क तेज कर दिया है। कहीं प्रत्याशी महिलाओं के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच घर-घर वोट मांग रहे हैं तो कहीं चुनाव चिन्ह 'एप्पल' से प्रचार किया जा रहा है। एक वार्ड में प्रत्याशी की तबीयत खराब होने पर पत्नी ने प्रचार की कमान संभाली, जबकि एक अन्य वार्ड में टिकट नहीं मिलने पर प्रत्याशी निर्दलीय मैदान में उतर गया। ज्यादातर वार्डों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई, स्ट्रीट लाइट, पार्क और खेल मैदान जैसे मूलभूत सुविधाओं के मुद्दे प्रमुख हैं। वार्ड 17: महिलाओं के साथ जनसंपर्क, भाजपा प्रत्याशी के घर भी पहुंचे वार्ड नंबर 17 से कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह मेड़तिया ने महिलाओं के साथ ढोल-नगाड़ों के बीच घर-घर जाकर जनसंपर्क किया और लोगों से समर्थन मांगा। जनसंपर्क के दौरान वे भाजपा प्रत्याशी सुरेश झंवर के घर भी पहुंचे और उन्हें प्रचार सामग्री देकर मतदान की अपील की। हालांकि बीजेपी प्रत्याशी घर नहीं थे लेकिन परिवार ने उनका आत्मीयता के साथ स्वागत किया। इस मुलाकात ने लोगों का भी ध्यान खींचा। मेड़तिया का घर भी कुंभानगर में ही है लेकिन वार्ड दूसरा है। जबकि बीजेपी प्रत्याशी का घर वार्ड 17 में होने के कारण उनके परिवार से भी वोट मांगे गए। महेंद्र सिंह मेड़तिया ने कहा कि पार्षद की सबसे बड़ी जिम्मेदारी वार्ड की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाना होती है। उनके अनुसार कुंभा नगर करीब 50 साल पुरानी कॉलोनी है, जहां आज भी पेयजल और पुरानी नालियों की समस्या बनी हुई है। अगर जनता उन्हें दुबारा मौका देती है तो इन समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ प्रचार करने के पीछे उनकी भावना यह है कि उन्हें हमेशा मातृशक्ति का सहयोग मिला है और आज वे जहां हैं, उसमें महिलाओं का बड़ा योगदान है। इसलिए उनका आशीर्वाद लेना जरूरी है। जनसंपर्क में शामिल महिलाओं ने भी कहा कि वार्ड में किसी भी जरूरत या परेशानी के समय सबसे पहले महेंद्र सिंह मेड़तिया को ही याद किया जाता है और वे हर समय लोगों के लिए उपलब्ध रहते हैं। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी सुरेश झंवर ने कहा कि वार्ड में सफाई, पानी और रोड लाइट सबसे बड़ी समस्याएं हैं। उनकी कोशिश रहेगी कि इन सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराया जाए और पूरे वार्ड को एक आदर्श वार्ड के रूप में विकसित किया जाए। वार्ड 59: एप्पल देकर चुनाव चिन्ह का प्रचार वार्ड नंबर 59 में इस बार प्रचार का तरीका सबसे अलग नजर आ रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी प्रमोद राजपुरोहित को चुनाव चिन्ह के रूप में एप्पल मिलने के बाद वे लोगों को प्रतीकात्मक रूप से सेब देकर अपने चुनाव चिन्ह की पहचान करा रहे हैं और मतदान की अपील कर रहे हैं। जनसंपर्क के दौरान उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से वार्ड में सक्रिय हैं और लोगों की समस्याओं को देखते हुए चुनाव मैदान में उतरे हैं। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी और पूर्व पार्षद को लेकर आरोप लगाया कि वार्ड के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि पार्टी से उनकी कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। उन्होंने पार्कों के विकास, खेल मैदान, सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं को अपनी प्राथमिकता बताया। दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी पूरन सिंह राणा भी लगातार घर-घर जाकर जनसंपर्क कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कार्यकाल में जो विकास काम अधूरे रह गए हैं, उन्हें पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने वार्ड में सामुदायिक भवन निर्माण, पार्कों के विकास और हाईमास्ट लाइट लगाने की बात भी कही। वार्ड 36: प्रत्याशी की तबीयत बिगड़ी तो पत्नी ने संभाला प्रचार वार्ड नंबर 36 में चुनाव प्रचार के दौरान एक अलग तस्वीर देखने को मिली। कांग्रेस प्रत्याशी नगेंद्र सिंह राठौड़ की दो दिन पहले तबीयत खराब होने के बाद उनकी पत्नी ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली। उन्होंने घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की और कांग्रेस के पक्ष में मतदान की अपील की। वहीं नगेंद्र सिंह के वापस लौटने के बाद उन्होंने जनसंपर्क के दौरान कहा कि वार्ड में पहले भी कांग्रेस का प्रतिनिधित्व रहा है और कई विकास काम हुए हैं। अब जो काम बाकी हैं, उन्हें पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। लोगों से बातचीत के दौरान बड़े नालों और स्ट्रीट लाइट की समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आईं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। वहीं भाजपा प्रत्याशी लोकेश सेठिया भी लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि घर-घर जाकर लोगों से बातचीत के दौरान कई लोगों ने कहा कि चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि अक्सर नजर नहीं आते। वार्ड 11: टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे राजकुमार वार्ड नंबर 11 से निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार तोलंबिया भी पूरे जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा से टिकट नहीं मिला, इसलिए वे निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका भाजपा या पार्टी नेतृत्व से कोई मतभेद नहीं है और वे विधायक चंद्रभान सिंह आक्या को अपना आदर्श मानते हैं। उनका कहना है कि पहले भी कई बार टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पार्टी प्रत्याशी का समर्थन किया था, लेकिन इस बार उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने का फैसला लिया। उन्होंने वार्ड में विकास कामों की जरूरत बताते हुए कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए वे चुनाव लड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि आचार संहिता लागू होने के दौरान भाजपा प्रत्याशी की मौजूदगी में सड़क बनाने के लिए सफाई कराई गई, जिसे उन्होंने नियमों के विपरीत बताया। सिर्फ वार्डवासियों को खुश करने के लिए यह किया गया है, जबकि दो साल जब किसी का बोर्ड नहीं था तब यह काम क्यों नहीं कराए गए। इस संबंध में भाजपा प्रत्याशी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। सड़क, नाली, पानी और सफाई प्रमुख मुद्दे अधिकांश वार्डों में सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सफाई, पार्क, खेल मैदान और सामुदायिक भवन जैसे मुद्दे सामने आ रहे हैं। प्रत्याशी इन्हीं मूलभूत सुविधाओं को लेकर मतदाताओं से समर्थन मांग रहे हैं।