कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मंच से पहली बार बेटे-बहू के सिलेक्शन को लेकर लग रहे सेटिंग के आरोपों का जवाब दिया। डोटासरा ने कहा- 2016 में मेरे बेटे का भी अकाउंट्स में सिलेक्शन हुआ था। आप सब सुनते होंगे इंटरव्यू में 80 नंबर कैसे आ गए ? आज बता रहा हूं, किसी को पता नहीं होगा। उस बैच में 144 अभ्यर्थियों के 80 या उससे ज्यादा अंक आए थे और इनमें से 26 ऐसे अभ्यर्थी भी थे, जो 80 या उससे ज्यादा अंक होने के बावजूद चयनित नहीं हुए। डोटासरा ने कहा- मेरी पुत्रवधू की ऑल राजस्थान में 9वीं रैंक आई थी। पढ़ेंगे तो आगे आएंगे। किसी के पेट में मरोड़ हो तो मैं उनके मरोड़े मिटाने के लिए कब तक चूर्ण खरीदकर देता रहूंगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई एक बार फिर हो सकती है। लिखकर दे रहा हूं। अगर बेईमानी की है तो जेल भेज दो। मैं समाज की प्रतिष्ठा पर कोई दाग नहीं लगने दूंगा। समाज की नाक पर मक्खी नहीं बैठने दूंगा, काला धब्बा नहीं लगने दूंगा। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने ये बातें रविवार को अजमेर के जवाहर रंगमंच में अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा समिति की ओर से आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में कही। इस दौरान मंच पर केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, प्रमुख शासन सचिव आरुषि मलिक सहित समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे। डोटासरा ने कहा… मेहनत और ईमानदारी का कोई विकल्प नहीं है। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखिए, झुकने की जरूरत नहीं है। मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़ने वाले व्यक्ति को किसी के सामने झुकने की जरूरत नहीं है। पैर छूने की परंपरा पर भी उन्होंने कहा- ब्लूटूथ का जमाना आ गया है, किसी को फेंकना हो तो फेंक दो कि प्रणाम फेंकता हूं, धोक फेंकता हूं, लेकिन नीचे मत झुको। डोटासरा के भाषण की 7 बड़ी बातें 1. कांग्रेस का राज होता तो हर चयन पर लगता डोटासरा का ठप्पा डोटासरा ने कहा- बड़ा-वड़ा कोई नहीं है, जो मेहनत करता है ना, वही बड़ा है। जो चरित्रवान है, वही बड़ा है। जो ईमानदार है, वही बड़ा है। उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं को आगे बढ़ने और समाज की आने वाली पीढ़ी को भी पढ़ाई, कोचिंग और सही दिशा देने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- कार्यक्रम में अलग-अलग विचारधारा और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग मौजूद हैं। मैं लिख के दे रहा हूं, यही प्रतिभा सम्मान समारोह होता और कांग्रेस का राज होता, तो सभी चयनित लोगों पर ठप्पा लग जाता डोटासरा ने सेटिंग करके कराया है। उन्होंने कहा- पिछले 4 साल से मैं इसी तरह के आरोपों का जवाब देते-देते थक गया। बोले- "जो मेहनत करेगा वो सक्सेस होगा, जो मेहनत नहीं करेगा, तेरी-मेरी करेगा, दलाली करेगा, किसी की चापलूसी करेगा, तो वो नहीं बढ़ेगा। उसका क्या इलाज है? मेरे पास क्या इलाज है?" 2. SI भर्ती से जुड़े अभ्यर्थी ने RAS में टॉप किया डोटासरा ने कहा- जिस 2021 की SI भर्ती को लेकर सवाल उठे और जिसे निरस्त किया गया, उसी प्रक्रिया से जुड़े एक अभ्यर्थी ने बाद में RAS में शीर्ष स्थान हासिल किया। मेरी मांग थी कि सरकार के पास संसाधन हैं तो बेईमानों को बाहर निकाला जाए और सही लोगों को न्याय दिया जाए। कोर्ट का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए। 3. अधिकारियों को नसीहत- न्याय की कुर्सी पर जाति नहीं, सही-गलत देखिए डोटासरा ने प्रशासनिक अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा- न्याय के लिए सामने आए व्यक्ति की जाति नहीं देखनी चाहिए, बल्कि उसका काम सही है या गलत, यह देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सही है और हमारी जाति का गलत है, तो सही के पक्ष में खड़े रहना। अधिकारी को न्याय की कुर्सी पर बैठाया गया है, इसलिए उसे निष्पक्ष होकर फैसला करना चाहिए। डोटासरा ने कहा कि ईमानदारी से काम करने पर अच्छी पोस्टिंग नहीं मिले, तब भी ईमानदारी नहीं छोड़नी चाहिए। जो ईमानदारी में ताकत है, वो मलाईदार पोस्टिंग में कभी नहीं हो सकती है। कोई समाज कभी भी खराब नहीं होता है। इसलिए सबको सैल्यूट करो, आदर करो, आगे बढ़ो, मेहनत करो, अपना नाम रोशन करो। साथ ही कहा कि किसी को सच्चे काम के लिए परेशानी आएगी तो वे उसके साथ खड़े रहेंगे। 4. रेवेन्यू कोर्ट में केवल दलाली हो रही डोटासरा ने कहा- रेवेन्यू कोर्टों में तो ईमानदारी से पैरवी की जरूरत ही नहीं है। केवल और केवल दलाली हो गई, इसके अलावा कुछ नहीं बचा। अपने वकालत के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा- ईमानदार अधिकारी के सामने वकील भी डरते थे, जबकि बेईमानी से फैसला करने वाले अधिकारी नजर मिलाने से बचते थे। 5. स्कूलों में प्रवेश पर रोक बेईमानी का फरमान शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में अनधिकृत प्रवेश को लेकर जारी आदेश पर भी डोटासरा ने सवाल उठाए। उन्होंने इसे "दोगलों की भरमार और बेईमानी का फरमान" बताते हुए आदेश वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा- स्कूल प्रबंध समिति और विद्यालय विकास समिति में भामाशाहों, गांव के लोगों और विधायक की अनुशंसा (सिफारिश) पर लोगों को जोड़ने का प्रावधान है। शिक्षा जैसी सार्वजनिक संस्था में अच्छे कार्य के लिए लोगों की भागीदारी पर रोक नहीं लगनी चाहिए। 6. निकाय चुनाव में टिकट पर बोले- मांगना सबका अधिकार डोटासरा ने कहा -टिकट मांगना हर कार्यकर्ता का अधिकार है। निकाय चुनाव के लिए जिला, ब्लॉक और निकाय स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं, जो चर्चा के बाद ऐसे उम्मीदवारों का चयन करेंगी, जो जनता के बीच रहते हैं और बेहतर उम्मीदवार हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। जनता के चहेते को अगर टिकट दी जाएगी, तो मैं समझता हूं कि जनता उसको जिताएगी। अजमेर कांग्रेस में दो धड़ों को लेकर पूछे गए सवाल पर डोटासरा ने कहा- वो सब एक करेंगे…एक कर देंगे। कांग्रेस का पूरा प्रयास रहेगा कि इस बार अजमेर में कांग्रेस का बोर्ड बने,अजमेर सहित कई जगह कांग्रेस बोर्ड बनने की पूरी उम्मीद है। अजमेर के स्थानीय भाजपा नेताओं और दो बार मेयर रह चुके नेताओं के बीजेपी छोड़ने के सवाल पर डोटासरा ने कहा कि वो तो सभी जाएंगे, अब तो पाप का घड़ा भर चुका है। दिल्ली में भी जाएंगे, यहां भी जाएंगे। अब देखना है क्या बचता है, क्या नहीं बचता। 7. महंगाई से लोग टूट रहे हैं महंगाई के सवाल पर डोटासरा ने केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा- महंगाई से तो लोग मर रहे हैं, टूट रहे हैं। उन्होंने चीनी, तेल और दाल सहित रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर सवाल उठाए। कहा- यूसीसी पर चर्चा जरूरी है या महंगाई पर। लोगों ने उम्मीद के साथ भाजपा को चुना था, लेकिन अब लोग निराश हैं। उन्होंने कहा- पर्चियों से मुख्यमंत्री बने और पर्चियों से ही काम हो रहे हैं। यहां का विजन कोई नहीं है। उन्होंने चुनौती दी कि ढाई साल में भाजपा सरकार की ऐसी एक जनहित योजना बताई जाए, जैसी योजनाएं कांग्रेस सरकार के समय आई थी। उन्होंने सरकार पर आपसी खींचतान में उलझे रहने और दिल्ली के दरबार में "धोक देने" में व्यस्त रहने का आरोप भी लगाया।